Wednesday, September 09, 2020


दोहा

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मात पिता गुरु देव सेे, रखता आदर भाव।
सफल काज उसके सदा, उतरे सागर नाव।

अधिक दर्द जब आ पड़े, मिले लोग विरक्त।
क्रोध सताए जब कभी, बन ईश्वर का भक्त।

साधना जब कर रहे, आंखें रख लो बंद।
पाप कर्म की बात पर, करो वाणी बुलंद।।

लाख गुजारिश कर चुके, होता नहीं सुधार।
देकर ज्ञान समाज को, करो समय बेकार।।

एक गुजारिश आपसे, मत होना नाराज।
छोड़ बुराई आज से, कर दुनिया पर राज।।



 वो दिल से आज भी बच्चा है
विधा-कविता

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  वो मन से बड़ा सच्चा है
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कलियुग लोग पुकार रहे,
              फिर भी सतयुग सा सच्चा है। 1।
लाख बुरे हैं लोग जगत में,
               वो फिर भी मन का अच्छा है। 2।
हजार बुराई लोग कर रहे,
              फिर भी नहीं कान का कच्चा है। 3।
हर बात साफ मन से कहे,
             यूं लगे दिल से आज वो बच्चा है। 4।

भौतिकवाद से दूर ही रहे,
             फिर भी दान धर्म से रखे रिश्ता है। 5।
वादा किया निभाता है,
             बस वचन का वो एक फरिश्ता है। 6।
कभी घमंड में नहीं जीए,
              वहीं देश वतन के लिए सच्चा है। 7।
शुद्ध आत्मा से बातें करे,
             यूं लगे वो आज दिल से बच्चा है। 8।
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बरगद और बुजुर्ग
विधा-कविता
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पूज रहे बरगद को जो
देता आया छाया फल,
इसकी छांव में बैठकर,
होती कई समस्या हल।

शुद्ध हवा देता आया है,
कांटे रहित कोमल तना,
लाख दवायें इससे बने,
मन प्रसन्न करता है घना।

सदियों से पूज रहे जन
गुणों की चर्चा है अपार,
छोटा बीज बड़ा है पेड़,
होता है  जीवन आधार।

बुजुर्ग भी बरगद भांति ,
देता आया, घर सहारा,
कमा कमा घर भर देता
होना चाहिए जग प्यारा।

महिमा बुजुर्ग की जानो,
वो होता है जगत महान,
धुतकार नहीं अरे पगले,
उसको धरा देव ले जान।
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घनाक्षरी
विधा-मनहरण घनाक्षरी
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गरीब जन पुकार रहे है प्रभु आप को,
एक बार फिर अवतार ले कर आओ,
त्राहि त्राहि मचा रहे है जग में लोग,
आके गरीब की लाज बचाइये।।
2.
चारो ओर मचा हुआ है हाहाकार अब,
कोई किसी की नहीं सुन पा रहा है,
कहां जाये किसे पुकारे अब वो डर में,
पुकार रहे प्रभु अब लाज बचाइये।

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