दोहा
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तन्मय तन से काम ले, साँसों का संसार।
रोग भोग की जिंदगी, बनती है बेकार।।
कौन फरिश्ता आज दिन, कैसे हैं ये लोग।
जन को घेरे आपदा, तब परखो जब रोग।।
तन्मय जीवन काम का, नीरस तन है पाप।
रोग भोग से दूर रख, पुण्य कर्म ले जाप।।
श्राद्ध पक्ष है दान का, करो नहीं अभिमान।
देव पुरुष को पूज कर,बनती है पहचान।।
श्राद्ध निकालो जब कभी, करना प्रभु को याद।
याचक बनकर धन मिले, करो कभी फरियाद।।
विषय- मेरी कामना
विधा-कविता
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मेरी कामना
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कामना प्रभु से कर रहा,
सुख की छांव मिले जन,
आपस में प्यार बढ़ जाए,
खुश रहे वृद्ध, बाल मन।
देश मेरा उन्नति करे फिर,
आगे बढ़ता जायेगा सदा,
खुशहाली में जीयेंगे लोग,
भूख प्यास में ना हो जुदा।
ख्याति मिले पूरे जगत में,
ज्ञान विज्ञान बढ़े देश का,
राम राज्य का सपना पूरा,
नहीं बचे दुश्मन देश का।
जोश से सीना भरा मिले,
बालक और जवान का,
भारत बुलंदियों को छुये,
डंका बजे देश शान का।
खुश होकर घर से निकले,
नहीं किसी को दर्द सामना,
हंसी खुशी में चहके महके,
अंतिम मेरी यह है कामना।
पड़ोसी देश प्रसन्न रहे तब,
भारत की उन्नति देख देख,
दुश्मन कोई सिर ना उठाये,
खुशहाली रूप हो अनेक।
कोई सिर उठाये दुश्मन तो,
करे पल में उसका खात्मा,
वीर बहादुर आगे बढ़े फिर,
खुश हो जांबाजों की आत्मा।
धरती को फिर से पूजे जन,
गायों का घर-घर हो वास,
सिरमौर जगत का कहलाए,
बस दिल में मेरी एक आश।
गोपाल फिर से दे दिखाई,
बहे फिर दूध दही नदियां,
हट्टे कट्टे छैल गाबरू हो,
याद रहे देश बीते सदियां।
मेरी कामना सभी विद्वान,
बच्चा-बच्चा बनेगा महान
श्रीराम गौतम की भूमि की,
याद आये फिर से जहान।
मेरे देश के देशभक्तों को,
जाने सारा ये विश्व जहान,
चौड़ी छाती करके चलेंगे,
भारत के सारे वीर जवान।
श्रीकृष्ण एक फिर आये,
बनकर जगत में गोपाल,
दर्शन हो जाए बंशीधर,
साथ में दिखे सारे बाल।
जग में रावण बढ़ गये हैं,
अवतार ले आओ श्रीराम,
मार डालों सारे रावण ये,
बन जाए सारे बिगड़े काम।
कदम कदम पर हवन हो,
खुश हो जाए साधु व संत,
सभी कौम गले मिल जाये,
नजर आये न कोई भिडं़त।
मेरी कामना समक्ष तुम्हारे,
भजन करता है होशियार,
बंशी बजाता ईश्वर आये,
घर घर फैले दाता प्यार।
हंसी खुशी मिलते रहे यूं,
इससे बड़ा कोई धाम ना,
दर्द का संकट छूटे जग से,
ईश्वर से मेरी यहीं कामना।
सारा जगत तब खुश रहे,
पूरी हो बस मेरी कामना,
हँसते हँसते जाये जग से,
नहीं हो कभी दर्द सामना।।



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