Thursday, September 24, 2020

 जरा सुनो
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विषय- नशे की गिरफ्त में युवा वर्ग और सरकार की जिम्मेदारी
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 नशे की गिरफ्त में युवा वर्ग बढ़ते ही जा रहे हैं   और सरकार शत प्रतिशत है जिम्मेदार है। सरकार चाहे तो नशीली चीजें बेचने वालों के लिए सख्त कानून बनाकर रोक सकती है। शराब आदि पूरे देश में बंद कर सकती है।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

दोहा ***********************

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सता किसी को हँस रहे, भूले दाता नाम।
लाख छुपा ले पाप को, एक दिन हो बदनाम।।

खाना पीना भूलकर, करे खेत पर काम।
भरे पेट वो देश का, कृषक पड़ा है नाम।।

पुण्य कर्म मेें ध्यान दो, बनो नहीं शैतान।
निज करनी का एक दिन,करना है भुगतान।।


क्या हुआ
विधा-कविता
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क्या  हुआ, संसार को?
पापों के,   व्यापार को,
बढ़ती इस, बेकार को,
सच्चे जन की हार को।

क्या हुआ, परिवार को?
वैमनस्य की दीवार को,
आपस में लड़ते मिलते,
खो गये, उस प्यार को।

क्या हुआ, भाई -भाई?
बढ़ गई आपस में खाई,
हँस रहे लोग ले जम्हाई,
शर्म लिहाज कहां भगाई।

क्या हुआ, माता -पिता?
जला रहे, उनकी चिता,
क्या हो गई, उनसे खता,
बेटा-बेटी, मिलते खपा।

क्या हुआ, ये समाज को?
आपस की बढ़ी आग को,
दुश्मनी के काले नाग को,
विषमता के गाते राग को।

क्या हुआ, हर प्रदेश को?
आपसी बढ़े एक द्वेष को,
भागमभाग जन की रेस को
सभ्यता वाले अवशेष को।

क्या हुआ, भारत देश को?
रणबांकुरों के, अशेष को,
एकता, अखंडता शेष को,
हड़प्पा मिले अवशेष को।

क्या हुआ, देश के मंत्री?
नहीं रहे, अब वो संतरी,
ले रहे जनता से ही वोट,
मार रहे उनको बस टोंट।

क्या हुआ, अब भाईचारा?
देख-देख जगत भी हारा,
गरीब पिसता जग बेचारा,
तग बना मूक दर्शक सारा।

क्या हुआ, अलगाववाद?
एकता की आती है याद,
किससे करे अब फरियाद,
बदल रहा है जन मिजाज।

क्या हुआ, सभी पूछ रहे?
जवाब कहीं ना मिल रहा,
और अब जाये जन कहां,
लगता है सुलग रहा जहां।।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
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*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
 व्हाट्सअप एवं फोन -09416348400
मेल आईडी-
इंस्टा आईडी--


हौसला
विधा-गीत
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हौसला दिल में रख,
आगे बढऩा सीख ले,
कोई तेरा साथ ना दे,
मत किसी से भीख ले।

हौसले की है कहानी,
करो न कभी मनमानी,
आए एक दिन जवानी,
होगी मौजों की रवानी।

हौसला नाम जिंदगी,
हौसला  नाम बंदगी,
हिम्मत से बढ़ा चल,
हर समस्या का हल।

हौसला गर छोड़ दे,
जीवन मुख माड़ ले,
हौसला गर दिल में
कांटों का मुंह तोड़ दे।

हौसला होता सहारा
मिलता इससे किनारा,
हो जाता  वारा न्यारा,
यही हो फर्ज हमारा।

हौसले से होता नाम,
कर देता सफल काम,
हौसले का नहीं दाम,
हौसला हे नाम राम।
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