दोहे
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रख जोड़े परिवार को, मिले एकता प्यार।
मोती माला टूटती, कहते मुक्ताहार।।
घर समाज को जोड़कर, फूले फले संसार।
मोती माला टूटती, बिखरे मुक्ताहार।।
घर समाज को जोड़कर, बनता है संसार।
मोती माला रूप में, बिखरे मुक्ताहार।।
मोती-मोती गँूधकर, बनता सुंदर हार।
टूटे माला जा गिरे, बनती मुक्ताहार।।
बिखरा समाज यूँ लगे, जैसे मुक्ताहार।
माला मोती ले पिरो, बढ़े जगत में प्यार।।
नमन दोहा शब्द-मुक्ताहार
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बिखरा समाज यूँ लगे, जैसे मुक्ताहार।
मोती माला प्यार से, गूँधे बनता हार।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्र्रगढ़,हरियाणा
दोहा ************************** *
जग धोखे की बेल है, लगते कड़वे फूल।
दुश्मन पर विश्वास से, होगा नष्ट समूल।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्र्रगढ़,हरियाणा
दोहा****************************
जग धोखे की बेल है, लगते कड़वे फूल।
दुश्मन पर विश्वास से, होए नष्ट समूल।।
मित्र नाम पर दे दगा, पापी की पहचान ।
समय रहे पहचान ले, वरना घटती शान।।
काम अधूरा जानतेे, करते ऊँची बात।
नर वो पापी जान ले, है छोटी औकात।।
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नमन दोहा *************************
बिखरा समाज यूँ लगे, जैसे मुक्ताहार।
मोती माला प्यार से, बने गूँधकर हार।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्र्रगढ़,हरियाणा
नमन ****************************
जग धोखे की बेल है, लगते कड़वे फूल।
दुश्मन पर विश्वास से, होए नष्ट समूल।।
मित्र नाम पर दे दगा, पापी की पहचान ।
समय रहे पहचान ले, वरना घटती शान।।
काम अधूरा जानतेे, करते ऊँची बात।
नर वो पापी जान ले, है छोटी औकात।।
राम नाम से जानते, ईश्वर का अवतार।
करता पालन देव वो, भरें दिलों में प्यार।।
किस्मत की जब मार हा़ेे, लुट जाए घर बार।
साथी भी मुँह फेर ले, पल में होती हार।।
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हिंद संस्कृति ,राम अभिव्यक्ति
विधा-कविता
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हिंद संस्कृति, राम अभिव्यक्ति, कहतीे सुबह शाम,
मन के मैल दूर हो पल में, बस रट लो उनका नाम,
बोलो जय श्रीराम ,बोलों घनश्याम,बोलो जय श्रीराम,
तुम हो जग के पालन कर्ता,अयोध्या में है सुंदर धाम,
बोलो जय श्रीराम.................।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, बस एक नाम के रटने से ही,
श्री राम मन रटने से ही, बन जाते हैं सब बिगड़े काम,
जय श्रीराम, बोलो जय श्रीराम,अयोध्या नगरी के राजा
विश्व विजेता प्रभु स्वामी हो,तेरा जगमग, कर रहा धाम,
बोलो जय श्रीराम...........।
दशरथ नंदन, सीता स्वयंवर,चमके सितारा, हे! रघुनंदन,
तेरी दया के सागर से हमरा,पल में कर दो तिलक चंदन,
चौदह वर्ष बनवास लिया , सीता मैया, लक्ष्मण गये साथ,
तेरे भरोसे ऋषि मुनि खुश,दुष्टों का किया था काम तमाम,
बोलों जय श्रीराम..............।
रावण जगत में हुआ अभिमानी, ऋषियों खूब सताया था,
सीता माँ हरण किया तो, गया वो प्रभु के हाथों ही धाम,
कमल नयन, तुम कहलाते,भरत को दे दिया पल में राज,
साधुवेश धारण कर लिया,वनवास में कमाया, तुमने नाम,
बोलो जय श्रीराम...............।
श्रीलंका गये दल बल सहित, कई योजन समुद्र, किया पार,
सुमित्रा, कैकई, कौशल्या मां,आशीर्वाद पाकर, किये काम,
अहिल्या, सबरी पार उतारी,हनुमत मिले तब संकट भारी,
काटे संकट हनुमत, जगत में,बोल बोलकर मन से ही राम,
बोलो जय श्रीराम.............।
विभीषण को दे राज तिलक, सीता माता को, वापस लाये,
रामराज्य का सुख, दिलाकर, सीधे पहुंचे तुम, बैकुंठ धाम,
मेरे प्रभु मेरे दाता, रखना खैर,तेरी एक दृष्टि मात्र मिटता बैर,
कोई पुकार रहा विष्णु रूप में,कोई कहे खाटू के तुम श्याम,
बोलो जय श्रीराम...............।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
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*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
विषय-भाई/भ्राता/सहोदर
विधा-मुक्तक
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1. मात्राभार-24
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भाई हो लखन जैसा, करे मां की सेवा।
जब भाई की सेवा हो, मिलती है मेवा।।
मित्र सा व्यवहार करे जब हो बेटा बड़ा,
भाई दुख का साथी बन जाता है देवा।।
2. मात्राभार-27
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भाई भाई में युद्ध हुआ, हुआ परिवार अंत।
भाई भाई में प्यार हो ,कह रहे कितने संत।।
कौरव-पाँडव लड़कर जग में भारी विनाश हुआ,
भाई भाई का सखा बनकर, सुख देता अनंत।।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
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विषय-देशप्रेम
विधा-दोहा
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देशप्रेम से भरा है, सीना जन जन प्यार।
नाम कमाए दूर तक, है जग का आधार।।
देशप्रेम की बात से, उबला जन का खून।
वीर देश के भक्त हैं, जिनके बिन सब सून।।
जगा रहे हैं देश में, देशप्रेम का भाव।
कुर्बानी दे जन सभी, चढ़ा हुआ है चाव।।
देशप्रेम से जागता, दिलों में देश प्यार।
एक बुलावे पर मिले, सम्मुख खड़े हजार।।
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