Sunday, August 30, 2020



 दोहा शब्द-चिंतक
****************************

शुभ चिंतक माँ बाप के, नाम था श्रवण कुमार।
मात पिता ले पालकी, दिखलाया संसार।।
****************************
-होशियार सिंह यादव,कनीना, महेंद्रगढ़,हरियाणा

नमन दोहा शब्द-चिंतक
*************************

चिंतक चिंतन कर रहे, दर्द भरा संसार।
बेटा बेटी घट गया, मात पिता से प्यार।।
****************************
-होशियार सिंह यादव,कनीना, महेंद्रगढ़,हरियाणा
नमन दोहा शब्द-चिंतक
****************************

शुभ चिंतक माँ बाप के, नाम था श्रवण कुमार।
मात पिता ले पालकी, दिखलाया संसार।।
****************************
-होशियार सिंह यादव,कनीना, महेंद्रगढ़,हरियाणा

विषय-नारी/स्त्री/अबला/अंगना/वामा
विधा-कविता
************************

भूल रहे हैं पुण्य को , पाप सजे दरबार।
नारी शोषण हो रहा, ढोंगी खड़े कतार।।

हँसकर हरते चीर अब, सजे रोज दरबार।
नारी शोषण हो रहा, ईश्वर लो अवतार।।

चंचल नारी चॉँद सी, करती रहे विभोर।
पिया मिलन की आश में, पायल करती शोर।।

जो नारी पति की सुने, होते हैं शुभ काम।
जिस घर महिला की चले, वो घर हो बदनाम।।

दर्द लिये संसार का, होठों पर मुस्कान।
ऑँँखों में आंसू भरे, नारी की पहचान।।




 लघुकथा आधारित सृजन
विषय -पर्व
विद्या -कविता

पर्व

============================
मना रहे पर्व निराला,
मिलकर लगते एक हैं,
पर भाषा,बोली से लगे,
धर्म व जाति अनेक हैं।

शिवालय में भीड़ लगी,
कर रहे जल अर्पित वे,
कतारबद्ध वो खड़े हुये,
सुंदर सजीला है संजोग।

होली के पर्व पर देखा,
रंग लगा रहे मिलकर,
अलग -अलग धर्म है,
हंस रहे खिल खिलर।

दीपावली का पर्व आये,
सारे ही  दीप जलाते हैं,
अलग जाति धर्म बेशक,
आपस में गले लगाते हैं।

कितने आते पर्व देश के,
सब मिलके हो जाते एक,
भारत देश एकता भरी है,
बेशक धर्म,जाति अनेक।।

नितांत मौलिक/स्वरचित
*****************



चित्र पर आधारित आयोजन
30 अगस्त 2020
**************

हम एक थे हम एक थे,
हम एक हैं, हम एक थे।
हम जीत गये, जीत गये,
हम जीत गये, हम एक हैं।

मंजिल मिली, पहुंचे वहां,
गायेंगे हम, जीत जाएंगे हम,
हम एक थे, हम एक हैं,
जीत गये हम, जीत गये हम।

हम खुश थे, हम खुश है,
अपने ही जहां, हम खुश थे।
कोई गिला नहीं, कोई डर नहीं,
हम जाएं जहां, हम एक थे.....

जाति अलग, भाषा अलग ,
वेष अलग, फिर एक तराना,
देख रहा हमको यहां यूं ही,
देश मेरा है,  भारत ठिकाना।
हम एक हैं....................।

हम एक थे हम एक थे,
हम एक हैं, हम एक थे।
हम जीत गये, जीत गये,
हम जीत गये, हम एक हैं।

No comments: