Friday, August 28, 2020





जरा सुनो
*************************

*********************************



******************************
वीर पुरुष कभी अपनी बहादुरी की गाथा नहीं गाते अपितु वे करने में अधिक विश्वास रखते हैं। ऐसे में करनी में विश्वास रखो कथनी में नहीं।
****************************
-विधा-दोहा

****************

रोष अकारण कर करे, युवा आज हताश।
अपने बल बुद्धि का, करते खुद ही नाश।।

बुरा चाहते देश का, वो पापी हैं घोर।
धरती पर वो पाप हैं, नहीं मिलेगा ठोर।।

मरते के मुँह में डले, घी की लंबी धार।
जीते जी को जल नहीं, कोई करे न प्यार।।

उजड़ रही हैं बस्तियां, कोई चले न जोर।
रोग बुरा यह बढ़ रहा, बेशक कर लो शोर।।

सोच अकारण नीच की, कर देते हैं घात।
पवित्र विचार हो कभी, जग बदले हालात।।







विषय-अफसोस
विधा-कविता
***************************

कोई किसी को मारता,
आता तब दिल जोश,
हम भी वहसी बने तो,
होगा बड़ा अफसोस।

कुत्ते खा रहे माल को,
गरीबों में पलता रोष,
कुएं में ही भाग पड़ी,
इसका बड़ा अफसोस।

देश तब कोई लूटता,
जन में पनपे आक्रोश,
खड़े तमाशा देख रहे,
होता बड़ा अफसोस।

अमीर घर को भर रहे,
गरीबी ले जन आगोश,
मुर्ग मसल्लम खा रहे वो,
इस बात का अफसोस।।


********************



रदीफ-कर
काफिया-आर
2122  2122 2122 212
*********************

दोष देना सीख साथी देख जग बेकार डर।
बोल वाणी खूब कड़वी सोच कर अब प्यार कर।।
**
आपने ही सोचना है कौन जन का साथ दे,
साथ में गर दोस्त हो तो खेल कोई वार कर।।
**
फूल भी खिलते रहेंगे मौसमी अंगार से,
इस जहाँ में कौन सच्चा आज यह जन कार कर।
**
दास बन जा खास देखो कौन किस्मत का धनी,
सोच आगे  की सदा, कैसा यहां सुविचार कर।।
**
कौन किसको चाहता देखा कभी ये दौर था,
 छू बुलंदी नभ कभी ना सोचता बेकार डर।।

No comments: