Monday, August 24, 2020

जरा ***********
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चेहरा फूल सा, काम जोश से, हार न मानने वाला जन कभी किसी से पीछे नहीं रह सकता। विपदा भी आकर लौट जाती हैं।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

दोहा
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बेटा चोरी कर रहा, बाप नशा है आज।
भेद खुलेंगे एक दिन, मिलती माटी लाज।।

घर आंगन में शोर था, देखो दुल्हन आज।
सास ससुर जब पीटते, खुले कई तब राज।।

दोहा शब्द-चांदनी
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आई दुल्हन झूमती, दूल्हा गाये गीत।
आंगन नाचे चांदनी, मन में जागे प्रीत।।
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विषय-बारिश की आहट
विधा-कविता
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नभ पर काली घटा छाई,
बादल गरज रहे घनघोर,
देख -देख नभ की घटा,
नृत्य कर रहे वन में मोर।

द्युति से चमक रहा नभ,
टप टप बूंदों का है शोर,
दादुर जल में टेर लगाते,
टिड्डे कर रहे मन विभोर।

कहीं काले, कहीं  नीले,
कहीं लोग करे भागदौड़,
कोई हँसता खिलखिला,
भरेंगे अब तड़ाग,जोहड़।

रेगिस्तान में उठी मतंग,
मतंग ऋषि के नाम पर,
बरसेंगी वो रेगिस्तान में,
फिर बारिश हो घर घर।

किसान हुये अब प्रसन्न,
भीगा उनका तन व मन,
खुशगवार होगा मौसम,
सावन गया, है अगहन।

बारिश की अब आहट,
चकौर की बढ़ी चाहत,
सूरज डूबा बादल ओट,
गर्मी हटे मिलेगी राहत।

चकवा चकवी मन हँसे,
सीप के मुंह, बने मोती,
किसानों ने ली है राहत,
अब मिलेगी खूब रोटी।

लहलहाएगी ये फसल,
अनाज कमी मिले हल,
टकटकी लगा देख रहे,
ताक रहे नभ पल पल।

तरुवर पर आयेगी बहार,
चित चोरों की बढ़े प्यास,
होगी जमकर अब बारिश,
मौसम आयेगा फिर रास।

इंद्रदेव लगते अब प्रसन्न,
हर्षित करते  बादल मन,
चलेगी ठंडी-ठंडी पवन,
भीगेगा फिर घर आंगन।

बरसात में खेलेंगे बच्चे,
हर मन को कर दे खुश,
किसान चले उठा हल,
बढ़ गई है चाहत सुख।

डूब रही विरह अग्रि में,
नवेली पिया गये विदेश,
झूला झूल रही अकेली,
यादें अब प्रियतम शेष।

प्रेमिका युगल  छुप रहे,
आंखों से ही करते बात,
नींद ना आएगी रात को,
कैसे मिले प्रियतमा साथ।

आते रहेंगे यूं ही बादल,
बीत जाएंगे दिन व रात,
कितने आये चले गये हैं,
कुछ छोड़ जाएंगे साथ।

लो बादल, बरसों खूब,
अमृत की करो बरसात,
मन में भर दो वो उमंग,
काम के लिए बढ़े हाथ।।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
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रदीफ-नहीं जाती
विधा-गजल
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अब याद दिल से नहीं जाती।
मन से निकाली नहीं जाती।।
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माना कि तुम कहीं मिल जाओ,
तुम भुलाई अब नहीं जाती।
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माना बुरा वक्त सताये,
दिल से क्यों नहीं तुम लजाती।
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कहते हैं मन तड़पाता,
मन क्यों नहीं समझाती।।

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