सुनो
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देशभक्ति का जज्बा अगर हर देशवासी के दिल में कूट कूटकर भरा हो तो दुनिया की कोई ताकत देश को सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने से नहीं रोक सकती है।
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दोहे
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धरती नभ को खोज कर, जन पहुँचा पाताल।
जागरूक बन देश में, बजा रहा वो ताल।।
राम चले जब वन गमन, भाई लगा वियोग।
दानव धरती के मिटे, सुंदर था संयोग।।
धरती माँ को पूजते, दर्द करे वो दूर।
करते श्रम प्यार से, चमका उनका नूर।।
धरती पर पापी बढ़े, और बढ़े अन्याय।
प्रभु आएंगे देव बन, देने को जन न्याय।।
पैदा करके धान भी, बना नहीं धनवान।
धरती सीना चीरना, किसान की पहचान।।
संस्कार
विधा- कविता
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संस्कार जन्मजात हो,
मात पिता करे प्रदान,
संस्कारों के बल पर,
इंसान की है पहचान।
भारत देश में सदा ही,
संस्कार रहे हैं महान,
श्रवण कुमार की जग,
हुई बहुत ही पहचान।
संस्कार विहिन नर को,
राक्षस दे दो बस नाम,
खुशी होगी हर जन को,
जब हो उसकी वो शाम।
संस्कार दिखे भरत राम,
लक्ष्मण का देखा त्याग,
देवों ने फूल बरसाये थे,
संपूर्ण भारत को है नाज।
भक्त प्रह्लाद, ध्रुव भक्त,
संस्कारवान बस औलाद,
जब तक सृष्टि रहेगी धरा,
आती रहेगी उनकी याद।
संस्कार ग्र्र्र्र्र्र्र्रहण कर लो तो,
समाज धरती फिरे पूजेगी,
संस्कार मन को काबू करे,
मन बुरी बात नहीं सूझेगी।।
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तोड़ दिया दम बूँदो ने
विधा- कविता
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तोड़ दिया दम बूँदों ने,
बारिश हुई अब कम,
किसान तके आसमान,
आँखें हो गई अब नम।
तोड़ दिया दम बूँदों ने,
जल स्तर गया है गिर,
भविष्य में जल संकट,
जन गया संकट से घिर।
तोड़ दिया दम बूँदों ने,
पौधों पर घटी है आब,
धरती पर सूखा मिलता,
खत्म हो गई घास डाब।
तोड़ दिया, दम बूँदों ने,
नदियां, झरने गये सूख,
जल शक्ति अब घटी है,
बढ़ गई इंसान की भूख।
तोड़ दिया दम बूँदों ने,
अब दम तोड़ेगा इंसान,
कर लो बचत जल की,
वरना मिटेगा तख्तोंताज।




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