Tuesday, August 18, 2020



जरा सुनो
****************************

***********************************
***********************
दूसरों के पथ में कांटे बिखेर आगे बढऩे की सोचने वालों की महज भूल होती है क्योंकि आगे बढऩे के लिए तो स्पर्धा चाहिए।
****************************


दोहा ****************************

********************************
**************************

बीड़ी हुक्का पी रहे, मिले किशोर जुनून।
ठेके खुले शराब के, नहीं बना कानून।

न्यायालय में लड़ रहे, मौन मिले कानून।
फँसा रहे निर्दोष को, बढ़ा वकील जुनून।।

न्यायालय में खून हो, अंधा है कानून।
सजा मिले निर्दोष को, कैसे मिले सुकून।।

पत्रकार तब ही बने, लिखना शौक जुनून।
हाथ कलम तब उठा, जगत ज्ञान कानून।।





विषय-साहित्य जगत और कवि
विधा-कविता
****************************

*************************************
*****************************
साहित्य जगत अति निराला,
बोले बात लगे भोला भाला,
उनकी कलम कभी चली है,
दोष समाज तब दूर निकाला।

साहित्यकार जगत  में आये,
साहित्य से किया नौनिहाल,
शब्दों की वो मार कर डाली,
पल में बदली जग की चाल।

प्रेमचंद,दिनकर, बच्चन आये,
साहित्य ने जगत जन लुभाये,
यशपाल, महादेवी व त्रिपठी,
निराला,तुलसी जैसे जग छाये।

महादेवी,गुप्त ने छेड़ी थी तान,
गुलेरी, पंत की बढ़ी थी शान,
माखन,कबीर,रहीम, सूरदास,
साहित्य की रही  देन महान।

उर्दू में जो काव्य लिखते रहे,
कहलाते हैं वो जग में शायर,
काव्य से जो कवि डरता हो,
वो कहलाए संसार में कायर।

खुसरो, हसरत,फाजली,मिर्जा,
इकबाल, गालिब, राणा, मीर,
बेचैन, जफर,दुष्यंत, बिस्मिल,
शायरी से हरी जगत की पीर।

कवियों की देश में लंबी सूची,
सभी की रही है काव्य में रुचि,
जुनून आज दिन काव्य मिलता
पर लेखन में मिलती है अरुचि।

तुलसी,कबिर, रहीम, रसखान,
मीरा, खानखाना,खुसरो हुये हैं,
वर्मा,कबीर,चक्रधर,सहजोबाई,
काव्य में इन्हें जिंदगी बीताई।

केदार,कुंवर, कृपालु, चतुर्वेदी,
नीरज,प्रसाद,भारती कवि नाम,
जोशी,गुप्ता, राही कवि हुये है,
समाज सुधार रहा बस काम।

वृंद, शैल, सुभद्रा,निराला हुये,
सुमन, जोशी  हुये वात्साययन,
पांडेय, शर्मा, पंत, गुप्त  कवि,
जिनसे बनी थी भारत पहचान।

भारती,शंकर,दास,तारा, ठाकुर,
मेहता, ग्रोवर, टेगोर और राही,
कितने ही कवि  हुये जगत में,
जिन्होंने जिंदगी में  की हँसाई।

कवि,शायर हो या साहित्यकार,
मिलता कलम,जग,जन से प्यार,
अपनी ओज,तेज,वाणी से कहे,
नहीं रखते कोई बात वो उधार।

समाज सुधारा और देश सुधारा,
सुधारा है उन्होंने यह पूरा संसार,
साहित्य के कारण नाम आज है,
कवियों से लोगों को अब प्यार।

एक जमाना था जब परतंत्र देश,
कलम,तलवार रखते साथ साथ,
देश को आजाद कराया वीरों ने,
कवि,लेखकों का भी रहा हाथ।

साहित्यकार हुये खूब जगत में,
जिनका निस्वार्थ होता था काम,
कवि कल्पना करके वार करता,
कर देता दुश्मन का काम तमाम।

नमन आज सभी साहित्यकारों,
नमन आज सभी शायर, कवि,
उनकी कल्पनाएं अलौकिक हो,
कवि जहां मिले नहीं वहां रवि।।
****************************


 विषय-गरीबी
विधा-कविता
******************************************

************************************




अमीरी गरीबी चलते रहे
इंसान को सिखाती खूब,
गरीबी बहुत कष्ट देती है,
क्या जाने धरा के ये भूप।

सुदामा गरीबी झेल रहा,
श्रीकृष्ण को मिला पता,
घर भर दिया धन दौलत,
माफ कर दी सारी खता।

गरीबी में पता लगता है,
कौन है अपना या पराया,
अमीरी को सभी चाहते,
गरीबी का ना पड़े छाया।

गरीबी मन को शुद्ध करे,
अमीरी भर  जाती घमंड,
कभी तो गरीबी का मिले,
हरिश्चंद्र का बड़ा एक दंड।

No comments: