Wednesday, August 05, 2020

संवाद

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हॅँसते छुपकर लोग जो, होते दुश्मन रूप।
नहीं किसी के काम के, चाहे हो वो भूप।।

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दोहा दर्पण

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छुरी प्रलोभन जब चले, करे वार पर वार।
प्रेम,प्रीत सब काटती, करती रहती मार।।
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--होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

जरा सुनो
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मर्यादा में बंधकर अटल रहने वाले, माता पिता एवं भाई के प्रति आदर भाव दिखाने वाले भगवान श्रीराम को सदियों तक याद किया जाता रहेगा।
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--होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

प्रलोभन
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छुरी प्रलोभन काटती,  तन,मन,जन,संसार।
चलती कटार लोभ की, नहीं मिलेगा प्यार।।

छुरी प्रलोभन काटती, , प्रेम,प्रीत जग प्यार।
धार लोभ की जब चले, कट जाये संसार।।

छुरी प्रलोभन जब चले, करे वार पर वार।
प्रेम,प्रीत सब काटती, करती रहती मार।।


दोहे
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बारिश जब होती कभी, टिड्डे करते शोर।
नभ के बादल देखकर, नाचे वन में मोर।।

हॅँसते छुपकर लोग जो, होते दुश्मन रूप।
नहीं किसी के काम के, चाहे हो वो भूप।।

नभ पर चाहे थूकना, ठोकर लगे हजार।
अपने को समझे बड़ा, जगत से नहीं प्यार।।

धरती माँ को पूजते, दर्द करे वो दूर।
मेहनत करे प्यार से, चमके उनका नूर।।






विषय-निर्णय
विधा-कविता
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सही वक्त पर, लिया फैसला,
निर्णय जगत में, बन जाएगा,
निर्णय में अगर चूक हो जाए,
जीवन भर इंसान दुख पाएगा। 1।

सोच समझकर, निर्णय लेना,
भविष्य को ध्यान में रख लो,
छोटी सोच अगर, इंसान की,
गलत निर्णय के कष्ट चखलो। 2।

इतिहास भरा है निर्णयों से ही,
सुन सुनकर इंसान दहल जाए,
कई बार तो निर्णय सुनकर ही,
खुद हँसता औरों को भी हँसाए।3।

निर्णय सच झूठ का कभी होता,
निर्णय गलत सही का भी होता,
निर्णयों पर कभी बैठती पंचायत,
गलत निर्णय सुन दिल भी रोता।4।

भरी सभा में जब जुआ खेल रहे,
पितामह, द्रोण जहां बैठे देख रहे,
कोई हिम्मत, नहीं कर पाया कि,
वो अनिष्ट कर रहे, उनसे ही कहे।5।

पांच गांव जब पांडवों, ने मांगे थे,
धृतराष्ट्र, दुर्योधन सभा में अड़े हुए,
सुई नोक बराबर जमीन ना दी तो,
निर्णय सुनकर पांडव दुख दर्द सहे।6।

अभिमन्यु अस्त्र शस्त्र ले युद्ध उतरे,
घेर लिया सात महारथियों ने उनको,
एक एक को युद्ध करना चाहिए था,
पर निर्णय लिया था जग में विख्यात।7।

श्रीराम वन में, सीता मां हरण हुआ,
बुद्धिमान रावण, निर्णय गलत लिया,
अंत हुआ उस अभिमानी रावण का,
गलत निर्णय से जग में वो मारा गया।8।

युद्ध भयंकर में तो निर्णय काम आए,
गलत निर्णय की सजा भोगते हैं जन,
सही गलत निर्णय, दिलवाता सजाएं
सही निर्णय हो तो सैनिक भी हर्षाये।9।

इतिहास गवाह है, जगत निर्णयों से,
किस किस निर्णय की यहां बात करे,
सही निर्णय की सोच बना लेना जग,
गलत निर्णयों से यह देश, संसार डरे।10।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
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*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400



विधा-भ्रष्टाचार बना प्रारूप
विषय-कविता
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रग रग भ्रष्टाचार भरा है,
कोई नहीं किसी से डरा है,
भ्रष्टाचार खात्मा मुश्किल,
भ्रष्टाचार अंदर से हरा है।
कहीं जाओ सिर चढ़ बोले,
घर बाहर दफ्तर में डोले,
फैल रहा है होले होले,
बंद करो यह देश भी बोले।
नहीं सुनता कोई किसी की,
पिस रहे हैं गरीब सारे,
आ पहुंचा यह द्वारा तुम्हारे,
शरीफ देखे खड़े बेचारे।
भारत मां अब तुम्हें पुकारे,
रिश्वतखोर बढ़ गये द्वारे,
नहीं बख्शेंगे किसी को ये,
बचकर रहना इनसे प्यारे।
गांव, शहर,दफतर में भी,
बैठे हैं भ्रष्टाचारी लोग,
कभी खत्म नहीं होता है,
यह है एक कैंसर का रोग।
अधिकारी लेते मोटी रिश्वत,
जितना बड़ा उतना भ्रष्टाचार,
लाख करो बेशक प्रचार,
होगी बस खुद की हार।
रिश्वत लेता रिश्वत देता,
बच जाते हैं जग में सारे,
भ्रष्टाचार में डूबे नेता,
भ्रष्टाचार मेें डूबे पेटू सारे।
मिटाने का प्रयास किया,
अल्प सफलता मिलती है,
भ्रष्टाचारी रहेंगे जग में,
इसको पनाह मिलती है।

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