Saturday, August 08, 2020




 दोहा
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शब्द-साधना,कामना,मुफलिस,अदालत
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चारो शब्दों के लिए एक दोहा-
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मुफलिस बेशक कामना, नहीं अदालत काम।
पूरी होगी साधना, मिले जहाँ में नाम।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा



1.शब्द-साधना
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शब्द-साधना
पूरी होगी साधना, जब कभी कामयाब।
मेहनत रंग शान का, तन पर लाये आब।।


2.शब्द-कामना
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दिल की होती कामना, नाम कमाए आज।
पूरे जग में हो सदा, काम धाम अरु राज।।
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3. शब्द-अदालत
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प्यार वार में हो कभी, नहीं अदालत  काम।
मात पिता को याद कर, जग में होगा नाम।।
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4.शब्द-मुफलिस
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मुफलिस बेशक जग कहे, तन मन मिले अमीर।
बुरा वक्त जब आ पड़े, थोड़ी रखना धीर।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

दोहा
शब्द-साधना
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शब्द-साधना
पूरी होगी साधना, जब कभी कामयाब।
मेहनत रंग शान का, तन पर लाये आब।।
-होशियार सिंह यादव

दोहा
शब्द-कामना
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दिल की होती कामना, नाम कमाए आज।
पूरे जग में हो सदा, काम धाम अरु राज।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा



शब्द-अदालत
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प्यार व्यार में हो कभी, नहीं अदालत  काम।
मात पिता को याद कर, जग में होगा नाम।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा



शब्द-मुफलिस
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मुफलिस बेशक जग कहे, तन मन मिले अमीर।
बुरा वक्त जब आ पड़े, थोड़ी रखना धीर।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

नमन दोहा ******************
चारो शब्दों के लिए एक दोहा-
शब्द-साधना,कामना,मुफलिस,अदालत
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दोहा----

मुफलिस बेशक कामना, नहीं अदालत काम।
पूरी होगी साधना, मिले जहाँ में नाम।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

दोहा
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शांति देखी यूं लगा, होने को है रात।
बच्चे रोते बहुत हैं, सुनो बड़ी है बात।।

रोना अच्छा भी लगे, जब हो बालक रूप।
नहीं सताओ बाल को, कहते कितने भूप।।

कड़ी मेहनत जब करे, सफल कर्म फल फूल।
मकरंद पुण्य कर्म हैं , कर लो उन्हें कबूल।।
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कुंडलियां-01
शांति देखी यूं लगा,  होने  को है रात।
बच्चे रोते बहुत हैं,  सुनो  जरूरी  बात।।
सुनो जरूरी बात ,तात  सुख  त्यागा सारा ।
मां की ममता देख,सभी कुछ तुझ पर वारा ।।
दोनों दिए निकाल,धरा  को  बना  बिछौना ।
अम्बर को छत मान,पड़े जीवन भर रोना ।।
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दोहा-
शांति देखी यूं लगा, होने को है रात।
बच्चे रोते बहुत हैं, सुनो जरूरी बात।।
दोहा-
रोना अच्छा भी लगे, जब हो बालक रूप।
नहीं सताओ बाल को, कहते कितने भूप।।

नमन
शब्द-मकरंद
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कड़ी मेहनत जब करे, सफल कर्म फल फूल।
मकरंद पुण्य कर्म हैं , कर लो उन्हें कबूल।।




आत्म सम्मान
विधा-कविता
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आत्म सम्मान जन का,
ले चलता ऊंचाई ओर,
आत्म चिंतन करते रहो,
सुनाई पड़ता एक शोर,
इस शोर को सुन लेता,
वो जन बनता है महान,
यह कोई कुछ ओर ना,
कहलाता आत्म सम्मान,
कहलाता...............।

जिसका न आत्मसम्मान,
जन समझो  धूल समान,
आत्मसम्मान के बल पर,
चलता है सारा यह जहाँ,
इस जहाँ में देख लो जन,
होता वहीं जन  कामयाब,
जिसने आत्म सम्मान को,
समझा बड़ा एक सम्मान,
यह कहलाता............। 

गरीब जन अगर हो यदि,
उसका भी आत्म सम्मान,
अमीर जन आगे न टिके,
जानता  यह सारा जहान,
इस जहान  को समझ ले,
हो जाता है वह कामयाब,
शान से जिया जग में जन,
जिसने विरोधी है अपमान,
यह कहलाता............।

राम भी आए जग में कभी,
दे रहे जगत को यह पैगाम,
जीना हो  तो शान से जीना,
बना जग में अपनी पहचान,
श्रीकृष्ण आये द्वापर युग में,
उनका भी यही एक पैगाम,
रक्षा करना आत्मसम्मान की,
चाहे चली क्यों न जाये जान,
यह कहलाता............।

सबका कहना मान ले अब,
सोच समझ  ले यही पैगाम,
बूढ़े बड़े सभी कह गये जग,
होना चाहिए  आत्मसम्मान,
आत्मसम्मान से जी रहा जो,
वो ही देव वो जग की शान,
आत्मसम्मान इस  जगत में
कहलाता है आन बान शान,
यह कहलाता............। 

आत्मसम्मान से जीये लाल,
पूरे जगत  में हुआ था नाम,
आत्मसम्मान से जीये भगत,
फांसी खाकर किया आजाद,
आत्मसम्मान से जीये सपूत,

दे गए पल भर में कुर्बानी,
वीर,सपूत, देशभक्त कितने,
आत्मसम्मान की राह ठानी,
यह कहलाता............।

यहीं आत्मसम्मान निशानी,
यही आत्मसम्मान निशानी।।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
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*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

विषय-बादल/मेघ
विधा-कविता
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बादल आये बारिश लाए,
किसान हँसेे और हँसाए,
बारिश पानी देख देखकर,
टिड्डे बैठकर गीत गुनगुनाए।

बादल बारिश जब होती,
पेड़ों पर आ जाती बहार,
अंबर पर जल जब बरसे,
चातक को हो जाता प्यार।

सीप में मोती बन जाता है,
जब पड़ती बारिश की बूंद,
मंदिर और  शिवालयों में,
होने लगी है हर हर गूंज।

लो बादल जल बरसाओ,
कब से कर रहे है इंतजार,
तेरी वर्षा की बूंदों से जग,
बढ़ जाता है अनमिट प्यार।।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
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विषय-पत्नी
विधा-गीत
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पत्नी देवी रूप होती,
आओ उसे हंँसायेंगे,
सारे मिलकर गाएंगे,
बच्चे मिलकर गाएंगे।

पोचा झाडू़ वो लगाए,
कपड़े धोए कम खाए,
पूरी कमर में दर्द मिले
सुबह वो चाय बनाएगी,
पत्नी देवी रूप...........।

दिनभर वो मेहनत करती,
वो बच्चों को है पालती,
मेहमानों की चाय बना
खाना मिलकर खिलाएगी,
पत्नी देवी रूप...........।

त्याग तपस्या मिले आगे,
बच्चों को पाठ पढ़ाएगी,
कभी नहीं हँसती मिलती
बच्चों का मन हर्षाएगी,
पत्नी देवी रूप...........।

पत्नी देवी रूप होती,
आओ उसे हंँसायेंगे,
सारे मिलकर गाएंगे,
बच्चे मिलकर गाएंगे।।

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