दोहा
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समाचार आया अभी, बारिश होगी आज।
प्रगति देश की हो रही,मोदी का है राज।।
दर्द मिले जग से कभी, अपने करे हलाल।
छुरी बगल में देख के, दिल को बड़ा मलाल।।
प्यास धरा की बूझती, जब होती बरसात।
जुगनू नभ पर नॉँचते, आए काली रात।।
लोग देखकर हॅँस रहे, चेहरा कहे कुरूप।
शिक्षा पाई खूब तो, बना सजीला रूप।।
कुत्ता काटे आदमी, मिले मिसाल हजार।
नर ने खाया श्वान को, वहीं है समाचार।।
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वादा/वचन/प्रतिज्ञा/कसम
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वादा करते आज हम, सेवा करेंगे देश,
दुष्ट का सिर कलम, बदले कितने वेष,
वचन पर हैं कायम, आंच नहीं आएगी,
आंच अगर आए तो, जान मेरी जाएगी,
प्रतिज्ञा में बंधे हुये, देश हमारा प्यारा है,
इसकी उन्नति में लगे, देश ने पुकारा है,
कसम आज हम खाते, करे अच्छे काम,
सदा बढ़ों आगे ही आगे, होगा देश नाम।
देश के दुश्मन जो है, कह दो उनसे आज,
देश में अगर रहना है, आ जाना है बाज,
अपने देश वतन पर, हमको बस है नाज,
एक दिन देख लेना, आएगा फिर रामराज।
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छंदमुक्त लेखन
विधा-कविता
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बहना के लिए
भाई तरस रहा
कर दी भ्रूण हत्या
हाथ सूने सूने
नहीं आता पास
भाइयों की कलाई
भरी धागों से
सोच रहा नर
मूर्ख हैं जग में
करते हैं पाप
एक ओर लड़की
दूजे भ्रूण हत्या पाप
कैसे कहे
इस जगत को
क्या है निर्दोष?
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विषय-महादेव
विधा-कविता
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त्रि-देवों में ऊपर, नाम मिलता सदा,
कहलाते हैं वो जगत में दव महादेव,
हर हर गंगे, हर हर शिव शंभु होते,
जगत पालन करते, तुम देवों के देव।
सुबह सवेरे उठकर, मंदिर जाते रोज,
प्रभु के दर्शन करे, हो जाती है मौज,
सारे जग को पालता, करे भली भली,
दाता के वरदान से,खिलती हर कली।
जब सृष्टि आरंभ हुई, प्रभु का था राज,
प्रभु बिना सब फीका,दर्द में दे आवाज,
मंदिर में बसा हुआ, शिव,माता,श्रीराम,
कण कण में बसा है, कहाता घनश्याम।
दाता एक रूप अलग, हर युग में मिले,
श्रीकृष्ण, श्रीराम, शिव, सब में वो बसे,
धरा पर खड़़े है, मंदिर और शिवालया,
शिवालय मिलता है,चाहे हो हिमालया।
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समाचार आया अभी, बारिश होगी आज।
प्रगति देश की हो रही,मोदी का है राज।।
दर्द मिले जग से कभी, अपने करे हलाल।
छुरी बगल में देख के, दिल को बड़ा मलाल।।
प्यास धरा की बूझती, जब होती बरसात।
जुगनू नभ पर नॉँचते, आए काली रात।।
लोग देखकर हॅँस रहे, चेहरा कहे कुरूप।
शिक्षा पाई खूब तो, बना सजीला रूप।।
कुत्ता काटे आदमी, मिले मिसाल हजार।
नर ने खाया श्वान को, वहीं है समाचार।।
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वादा/वचन/प्रतिज्ञा/कसम
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वादा करते आज हम, सेवा करेंगे देश,
दुष्ट का सिर कलम, बदले कितने वेष,
वचन पर हैं कायम, आंच नहीं आएगी,
आंच अगर आए तो, जान मेरी जाएगी,
प्रतिज्ञा में बंधे हुये, देश हमारा प्यारा है,
इसकी उन्नति में लगे, देश ने पुकारा है,
कसम आज हम खाते, करे अच्छे काम,
सदा बढ़ों आगे ही आगे, होगा देश नाम।
देश के दुश्मन जो है, कह दो उनसे आज,
देश में अगर रहना है, आ जाना है बाज,
अपने देश वतन पर, हमको बस है नाज,
एक दिन देख लेना, आएगा फिर रामराज।
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छंदमुक्त लेखन
विधा-कविता
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बहना के लिए
भाई तरस रहा
कर दी भ्रूण हत्या
हाथ सूने सूने
नहीं आता पास
भाइयों की कलाई
भरी धागों से
सोच रहा नर
मूर्ख हैं जग में
करते हैं पाप
एक ओर लड़की
दूजे भ्रूण हत्या पाप
कैसे कहे
इस जगत को
क्या है निर्दोष?
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विषय-महादेव
विधा-कविता
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त्रि-देवों में ऊपर, नाम मिलता सदा,
कहलाते हैं वो जगत में दव महादेव,
हर हर गंगे, हर हर शिव शंभु होते,
जगत पालन करते, तुम देवों के देव।
सुबह सवेरे उठकर, मंदिर जाते रोज,
प्रभु के दर्शन करे, हो जाती है मौज,
सारे जग को पालता, करे भली भली,
दाता के वरदान से,खिलती हर कली।
जब सृष्टि आरंभ हुई, प्रभु का था राज,
प्रभु बिना सब फीका,दर्द में दे आवाज,
मंदिर में बसा हुआ, शिव,माता,श्रीराम,
कण कण में बसा है, कहाता घनश्याम।
दाता एक रूप अलग, हर युग में मिले,
श्रीकृष्ण, श्रीराम, शिव, सब में वो बसे,
धरा पर खड़़े है, मंदिर और शिवालया,
शिवालय मिलता है,चाहे हो हिमालया।





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