Friday, August 21, 2020

 दोहा शब्द-मुरली
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मोहन की मुरली बजे, बढ़ जाता है प्यार।






दुश्मन पल में नष्ट हो, कभी नहीं हो हार।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा


नमन दोहा संवाद
शब्द
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धर्म कर्म करते रहो, कहते ज्ञानी संत।
पुण्य कभी जब साथ हो, होता सुंदर अंत।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा



विधा-दोहा


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धर्म कर्म करते रहो, कहते ज्ञानी संत।
पुण्य कभी जब साथ हो, होता सुंदर अंत।।

मोहन की मुरली बजे, बढ़ जाता है प्यार।
दुश्मन पल में नष्ट हो, कभी नहीं हो हार।।

प्यासे लब जन के मिले, मिलता बहुत उदास।
पानी धारा जब मिले, तब बूझेगी प्यास।।

प्यासे लब यूँ लग रहे, कहे अभी कुछ बोल।
मीठी बातों का रहा, जगत सदा ही मोल।।

मित्र नाम पर दे दगा, पापी की पहचान ।
समय रहे पहचान ले, वरना घटती शान।।






विषय-शृंगार रस(प्रेम, विरह)
विधा-कविता
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कृष्ण लीलाओं में शृंगार रस
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बसों मेरे दिल में गोपाल ,
तुमने यमुना रास रचायो,
पूजे दुनिया सारी तुमको,
तुमने ही  जगत हंॅसायो।।

मेरे प्राणों में आ जाओ,
तुम कहलाते देव हमारे,
तेरे ही दर्शन के प्यासे हैं,
सभी राह में खड़े तुम्हारे।


जब-जब तुमको पुकारा,
हो जाते हैं दर्शन तुम्हारे,
एक विनति करते तुमसे,
फिर आओ पास हमारे।

लाख उल्हाना  दे रही,
गोपियां मिलकर सारी,
कहती यशोदा माता से,
सुन लो ये अर्ज हमारी,

कृष्ण छेड़ता हैं हमको,
आ जाता  नदी किनारे,
जब हम नहाए जल में,
कपड़े उठा लेता हमारे,

राधा सुन सुन हंस रही,
कैसी करती बातें सारी,
मां यशोदा भी हंस रही,
लगती सूरत अति प्यारी।

खूब उल्हाना सुनकर वो,
पूछेंगी श्रीकृष्ण से सारी,
बांध दूंगी ऊखल से उन्हें
माफ करो अबकी बारी।

गोपियां डूब रही दर्द में,
मथुरा चल  पड़े गोपाल,
राधा भी प्रेम में लीन थी,
हो चला अब बुरा हाल।

यशोदा व  देवकी खड़ी,
रो रही देखके वो लाल,
जा रहे कंस के वो पास,
नहीं पता क्या हो हाल।

मथुरा की ओर चले वो,
रो रहे सभी ग्वाल बाल,
उस तरफ कंस को देखो
बजा रहा खड़ा दुष्ट ताल।

प्रेम कृष्ण के डूब रहे है,
छोटे नटखट नंद गोपाल,
करेगा कंस से युद्ध जाके
हो जाएगा तब बुरा हाल।

जीत हुई जब श्रीकृष्णजी,
मथुरा में तब  प्रेम हर्षाया,
मथुरा और देशवासी खुश
हर जन ने फूल बरसाया।।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
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*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01


गजल लेखन
काफिया-आर
रदीफ-है
2122 2122 212
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दूर तो जाना नहीं व्यापार है।
पास तो आना नहीं ये प्यार है।।
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जब कभी देखा तुम्हें ऐसा लगा।
पास में सारा जगत आधार है।।
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खेल हम ऐसा कभी ना खेलते,
जिंदगी हमको लगे बेकार है।
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शाम भी ढल कर कहेगी भोर में,
साथ मेरे खूब ये संसार है।।


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