दोहा ****************
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दोहा नंबर-01
प्रमाणित
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करो प्रमाणित बात को, झूठ मिले अपमान।
बातें सच्ची बोलकर, जन की बढ़ती शान।।
दोहा नंबर 02
अट्टालिका
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नहीं महल अट्टालिका, जंगल में है वास।
खाने को फल फूल हैं, रहे रोग ना पास।।
दोहा नंबर 03
उलाहना
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उलाहना सुन देवकी, पकड़ा कान्हा कान।
राधा हँसकर कह रही, करो नहीं अपमान।।
दोहा नंबर 04
षडय़ंत्र
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षडय़ंत्र जब रच लिया, हुआ सभा अपमान।
द्रोपदी चीर हर रहें, कौरव बन अज्ञान।।
विषय-भक्ति की शक्ति
विधा-कविता
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भक्त निराले पूजा करते,
घोर विपत्ति से ना डरते,
तप करते करते वो मरते,
फिर देवता विपत्ति हरते।
पूजा होती कई देवों की,
भक्ति की शक्ति अपार,
देवों का आशीर्वाद मिले,
नहीं होती कभी भी हार।
गंगाजी धरा पर लाने को,
तप किया सगर अंशुमान,
देवलोक से ना आई गंगा,
मिला नहीं उन्हें प्रभु प्यार।
भागीरथ नेे घोर तप किया,
भागीरथी बन गया प्रयास,
गंगा आई धरती पर कहीं,
पापों का किया फिर नाश।
घोर भक्ति की अर्जुन जब,
शिवभोले हुये अति प्रसन्न,
कौरवों पर विजय पाई थी,
हर्षित हुआ था तन व मन।
उत्तानपाद की पत्नी सुनीती,
धु्रव भक्त को जन्म दिया,
एक पैर पर विष्णु तप कर
ध्रुवतारा नभ बन नाम किया।
प्रह्लाद भक्त ने घर तप कर,
विष्णु से पाया बहुत प्यार,
होलिका ने मारना भी चाहा,
जल गई होलिका हुई हार।
मीरा, सहजो हैं हुई भक्तिन,
कृष्णरूप में पाया था गहना,
तुलसी ने राम दर्शन खातिर,
कितने कष्ट पड़ा था सहना।
तीनलोक का प्रथम पत्रकार,
नारद मुनि कहलाए जग में,
कष्टों को दूर किया जग के,
भक्ति में छू लिया नभ को।
सूरदास ने भक्ति की लेखन,
श्रीकृष्ण के हुये अंध दर्शन,
भक्त की खातिर तैयार रहे,
उठाया प्रभु विष्णु सुदर्शन।
हनुमान जैसा नहीं जगत में,
हुआ ना हो सकता है भक्त,
भगवान श्रीराम की खातिर,
दुश्मन का बहा डाला रक्त।
प्रभु के कितने हुये है भक्त,
भक्ति की अपार हो शक्ति,
नैया जन की पार हो जाए,
कर लो प्रभु ईश्वर की भक्ति।।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
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विषय-गणपति बप्पा मोरया
विध-कविता
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विघ्र हरो, बल बुद्धि दो,
रूप ने दिल मोह लिया,
देवों में प्रथम हो पूजन,
हे गणपति बप्पा मोरया।
रिद्धि सिद्धि के दाता हो,
बुद्धिबल में तुम्ही अपार,
शिव परिवार के सदस्य,
दे दो श्रद्धा, भक्ति, प्यार।
हर दिन हर जन पूजा करे,
हर जन की विपत्ति हरते,
तुम बिना नहीं बनते काम,
जीव जगत में है तेरा नाम।
गणेश चतुर्थी,पूजा हो भारी,
कई दिनों पूर्व करते तैयारी,
फिर करवा चौथ पर पूजते,
महिमा तेरी है सबसे न्यारी।
नौ दिनों तक पूजा होती है,
मूर्ति का जल हो विसर्जन,
गणपति बप्पा मोरया पुकारे,
गाये गाथा तेरी धरा हर जन।
आओ घर मेरे पार्वती नंदन,
मूसक सवारी,मोदक पसंद,
लंबोदर, माथे तिलक चंदन,
बुद्धि बल दो, करते वंदन।।
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दोहा नंबर-01
प्रमाणित
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करो प्रमाणित बात को, झूठ मिले अपमान।
बातें सच्ची बोलकर, जन की बढ़ती शान।।
दोहा नंबर 02
अट्टालिका
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नहीं महल अट्टालिका, जंगल में है वास।
खाने को फल फूल हैं, रहे रोग ना पास।।
दोहा नंबर 03
उलाहना
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उलाहना सुन देवकी, पकड़ा कान्हा कान।
राधा हँसकर कह रही, करो नहीं अपमान।।
दोहा नंबर 04
षडय़ंत्र
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षडय़ंत्र जब रच लिया, हुआ सभा अपमान।
द्रोपदी चीर हर रहें, कौरव बन अज्ञान।।
विषय-भक्ति की शक्ति
विधा-कविता
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भक्त निराले पूजा करते,
घोर विपत्ति से ना डरते,
तप करते करते वो मरते,
फिर देवता विपत्ति हरते।
पूजा होती कई देवों की,
भक्ति की शक्ति अपार,
देवों का आशीर्वाद मिले,
नहीं होती कभी भी हार।
गंगाजी धरा पर लाने को,
तप किया सगर अंशुमान,
देवलोक से ना आई गंगा,
मिला नहीं उन्हें प्रभु प्यार।
भागीरथ नेे घोर तप किया,
भागीरथी बन गया प्रयास,
गंगा आई धरती पर कहीं,
पापों का किया फिर नाश।
घोर भक्ति की अर्जुन जब,
शिवभोले हुये अति प्रसन्न,
कौरवों पर विजय पाई थी,
हर्षित हुआ था तन व मन।
उत्तानपाद की पत्नी सुनीती,
धु्रव भक्त को जन्म दिया,
एक पैर पर विष्णु तप कर
ध्रुवतारा नभ बन नाम किया।
प्रह्लाद भक्त ने घर तप कर,
विष्णु से पाया बहुत प्यार,
होलिका ने मारना भी चाहा,
जल गई होलिका हुई हार।
मीरा, सहजो हैं हुई भक्तिन,
कृष्णरूप में पाया था गहना,
तुलसी ने राम दर्शन खातिर,
कितने कष्ट पड़ा था सहना।
तीनलोक का प्रथम पत्रकार,
नारद मुनि कहलाए जग में,
कष्टों को दूर किया जग के,
भक्ति में छू लिया नभ को।
सूरदास ने भक्ति की लेखन,
श्रीकृष्ण के हुये अंध दर्शन,
भक्त की खातिर तैयार रहे,
उठाया प्रभु विष्णु सुदर्शन।
हनुमान जैसा नहीं जगत में,
हुआ ना हो सकता है भक्त,
भगवान श्रीराम की खातिर,
दुश्मन का बहा डाला रक्त।
प्रभु के कितने हुये है भक्त,
भक्ति की अपार हो शक्ति,
नैया जन की पार हो जाए,
कर लो प्रभु ईश्वर की भक्ति।।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
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विषय-गणपति बप्पा मोरया
विध-कविता
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विघ्र हरो, बल बुद्धि दो,
रूप ने दिल मोह लिया,
देवों में प्रथम हो पूजन,
हे गणपति बप्पा मोरया।
रिद्धि सिद्धि के दाता हो,
बुद्धिबल में तुम्ही अपार,
शिव परिवार के सदस्य,
दे दो श्रद्धा, भक्ति, प्यार।
हर दिन हर जन पूजा करे,
हर जन की विपत्ति हरते,
तुम बिना नहीं बनते काम,
जीव जगत में है तेरा नाम।
गणेश चतुर्थी,पूजा हो भारी,
कई दिनों पूर्व करते तैयारी,
फिर करवा चौथ पर पूजते,
महिमा तेरी है सबसे न्यारी।
नौ दिनों तक पूजा होती है,
मूर्ति का जल हो विसर्जन,
गणपति बप्पा मोरया पुकारे,
गाये गाथा तेरी धरा हर जन।
आओ घर मेरे पार्वती नंदन,
मूसक सवारी,मोदक पसंद,
लंबोदर, माथे तिलक चंदन,
बुद्धि बल दो, करते वंदन।।







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