Sunday, August 02, 2020


नवोदित 

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प्रभु जग बैठा देखता, भाई बहना प्यार।
राखी का त्योहार है, यमी दिया उपहार।।

सजती राखी हाथ पर, दिल में उमड़े प्यार।
एक वर्ष का पर्व है, आशीर्वाद हजार।।

रक्षा बंधन देश में, भरे एकता प्यार।
भाई बहना के लिये, खुद होता उपहार।।

मना रहे त्योहार हैं, रक्षा बंधन  नाम।
बहना भाई प्यार ही, लगता भोला धाम।।

रक्षा बंधन पर्व है, ले आया उपहार,
भाई बहना बीच में, जग का अटूट प्यार।।

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 दोहा दिवस-शनिवार

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जब दुख जन को घेरते, आता पतझड़ मास।
सूखे पेड़ नजर आये, आते कभी न रास।।

खूब कमाते लोग हैं, मिले नहीं आराम।
खाना पीना छोड़ कर, रात दिन करे काम।।

पैदा जब इंसान हो, मिलता ऋण का भार।
लाख शीश के दान से, सकता नहीं उतार।।

जब तक प्राण शरीर में, पुतला भी इंसान।
तन से निकले सॉँस तो, माटी काया मान।।

वो प्रभु बैठा देखता, भाई बहना प्यार।
राखी का त्योहार है, यमी दिया उपहार।।



नमन दोहा ****************************
जब दुख जन को घेरते, आता पतझड़ मास।
सूखे पेड़ नजर आये, आते कभी न रास।।

खूब कमाते लोग हैं, मिले नहीं आराम।
खाना पीना छोड़ कर, रात दिन करे काम।।

पैदा जब इंसान हो, मिलता ऋण का भार।
लाख शीश के दान से, सकता नहीं उतार।।

जब तक प्राण शरीर में, पुतला भी इंसान।
तन से निकले सॉँस तो, माटी काया मान।।

वो प्रभु बैठा देखता, भाई बहना प्यार।
राखी का त्योहार है, यमी दिया उपहार।।



विषय-ख्वाहिशें
विधा-कविता
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जन्म लिया इंसान ने
होती जीने की आस,
ख्वाहिश हो जन की
धन-दौलत हो पास।

सुंदर हो एक बंगला
नौकर करते हो काम,
दूर दराज तक देश में,
अपना एक हो नाम।

घर में जब मैं जाऊगा,
आगे पीछे सब नौकर,
चाय मेज पर रखी हो
जब उठता मैं सोकर।

सुंदर सी एक बीवी हो,
सेवा करती हो दिनरात,
ख्वाहिश होती दिल की
आये नहीं दुख की रात।

घर में दूध, घी ,मक्खन,
बने घर विभिन्न पकवान,
जगत में  फैले नाम मेरा
शाही ठाठ बाट व शान।

पढ़े लिखे घर हो बच्चे,
गाये हर दिन गीता सार,
ख्वाहिश मेरे  दिल की,
घोड़े सैर को मिले तैयार।

लंबा चौड़ा खेत हो मेरा,
चारों ओर महके गुलाब,
ख्वाहिश मेरे दिल की है
यूं महकता मिले शबाब।

धन दौलत के भंडार हो,
गाये ये पक्षी राग मल्हार,
बारिश रिमझिम पड़ रही
पले पूरे जगत का प्यार।

पहनने को नये वस्त्र हो,
मिलने आये दोस्त हजार,
ख्वाहिशें पूरी कैसे होंगी,
बढ़ता ही जायेगा खुमार।

आयेगा फिर वो सवेरा,
संकट सारे हो जाए दूर,
ख्वाहिशें दिल की मिटे
नहीं रहेगा फिर गरूर।। 
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विधा-कविता
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सोच रही बहना आज
जाना है भाई के पास,
साधन सारे बंद पड़े हैं,
मिलन की बड़ी आस।

रोगों ने है खूब सताया,
दर्द ने हमें अब रुलाया,
राखी का बड़ा त्योहार,
उस पर भाई का प्यार।

राखी हमने अब खरीदी,
सामान कर लिया तैयार,
राखी अपनी खरीद ली,
मिलेगा भाई का प्यार।

नहीं रोक पाएगा ये रोग,
भाई बहना  का संयोग,
एक वर्ष बाद आता है,
मिठाई का लगता भोग।

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