Wednesday, October 07, 2020



जरा सुनो
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विषय-जातीय विद्वेष फैलाने के नाम पर दंगे और फंडिग
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राजनीति चमकाने का एक सस्ता एवं लोकप्रिय साधन दंगे फैलाना एवं फंडिग बन गया है। जो जातीय द्वेष का   

दोहा दुत्कार
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डांट डपट दुत्कार सेे, होता नव संचार।
शिक्षक देता शिष्य को, कहलाता उपहार।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा



दोहा  ****************************
पांडव बल था एकता, भाई भाई का प्यार।
काम सदा होते सफल,प्रेम धरा आधार।।







हर्ष/खुशी/आनंद/सुख
विधा-कविता
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खुशी होती इंसान को,
करता कोई शुभ कर्म,
गरीबों की सेवा करो,
होता बहुत बड़ा धर्म।

थोथे आनंद लेते जो,
वो खुशी नहीं देते हैं,
खुशियों के आंसू तो,
मन आनंद भर देते हैं।

मन को जब खुशी हो,
वो काम जरूर करना,
गरीब की सेवा करना,
कभी नहीं तुम डरना।।


विधा-कविता
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अक्कड़ अक्कड़ कर देखे दर्पण,
टिन्नी हो चुकी है कितनी बड़ी,
एक दिन हाथ पीले करने होंगे,
वो भी आएगी एक दिन घड़ी।

जूते सारे छोटे होते जा रहे हैं,
कपड़े भी होते जा रहे हैं तंग,
अपनी हंसी वो, रोक ना पाते,
देख देखकर हो, जाते हैं दंग।

दर्पण भी क्या अजब होता है,
दिखला देता जन का प्रतिरूप,
क्या अजब परावर्तन कर देता,
सामने से जब कभी पड़े धूप।

युवा पीढ़ी दर्पण की फैन हो,
मिनट मिनट में देखती चेहरा,
क्यों नहीं देखेंगे वो दर्पण को,
जवानी दीवानी डालती डेरा।।
चूडिय़ां
विधा-कविता







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कांच की चूडिय़ां,होता रंग अनेक,
विवाहिता की निशानी, कार्य नेक,
सुहाग की निशानी, हाथों में पहने,
औरत की लाज शर्म,हाथों में पहने।

चूडिय़ां पहनी हाथ, बड़ी कहावत,
हाथों को न उठाती,वरना करे दुर्गत,
चूडिय़ां जब खनकती, कहाए नाच,
चूडिय़ां नहीं पहनी,आई बड़ी आंच।

औरत का शृंगार है, मर्दों का प्यार,
चूडिय़ां पहन लो, समझों  हुई हार,
चूडिय़ां पतिदेव ही,दे पत्नी को दान,
विवाह शादी में चूडिय़ां ही पहचान।

जब कभी चूड़ी टूटे, बहता सैलाब,
आंसुओं का समंद्र,फैले जब जहान,
सब कुछ तबाह होता,आएगा तूफान,
चूडिय़ों का टूटना,बिगड़े जगत शान।
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