जरा सुनो
****************************
********************************
******************************
विषय-निक्मापन और आधुनिक युवा वर्ग
****************************
आधुनिक युवा सरकारी नौकरी पाने, स्वयं के रोजगार न करने एवं आलसी जीवन जीने की चाहत रखता है।
***************************
दोहा धृष्टता
************************
************************
करे धृतराष्ट्र धृष्टता, चाल चले दिनरात।
कौरव सारे मिट गये, फिर समझा औकात।
**********************
धृष्टता
************************
करे धृतराष्ट्र धृष्टता, चाल चले दिनरात।
कौरव सारे मिट गये, फिर समझा वो बात।
दिल को अब तक
*************************
दिल को अब तक दर्द मिला,
ख्वाहिश-ए-तमन्ना थी प्यार। 1।
उम्र दराज उसकी चाहत में,
हसरतें दफन मिला धुत्कार। 2।
आरजू-ए-तमन्ना मिट गई है,
तन्हाई दिल में है बरकरार। 3।
सोचा नहीं था दफन-ए-खाक,
सपने बिखरेंगे टूट तार-तार। 4।
गम-ए-जमाने ने सताया मुझको,
भटकते दिल में छुपाके हार। 5।
दिल को अब तक शकुन नहीं है,
सुपुर्द-ए-खाक तुर्बत में प्यार। 6।
****************************
दिल को अब तक
*************************
दिल को अब तक दर्द मिला,
हसरत-ए-तमन्ना थी प्यार। 1।
उम्र दराज उसकी चाहत में,
हसरतें दफन मिला धुत्कार। 2।
आरजू-ए-तमन्ना मिट गई है,
तन्हाई दिल में है बरकरार। 3।
सोचा नहीं था दफन-ए-खाक,
सपने बिखरेंगे टूट तार-तार। 4।
फूलों का मकरंद उन्हें मिला है,
भटकते दिल में छुपाके हार। 5।
दिल को अब तक शकुन नहीं है,
सुपुर्द-ए-खाक होना है प्यार। 6।
**************************** ******************
-लांछन
विधा-कविता
************************
लांछन है बुरी चीज,
लगे किसी के सिर,
जीवन भर रोता रहे,
कठिनाइयों में घिर।
लांछन औरत लगे,
कहीं नहीं है ठौर,
उससे अच्छा जगत,
कहलाते जो है चोर।
लांछन एक, दाग है,
मिटे ना करो प्रयास,
कितने रो रो मर गये,
आया ना उन्हें सांस।
लांछन से, बचना है,
बेशक जाये ये जान,
लांछन से बच जाए,
बनती जन पहचान।
************************
नितांत मौलिक,स्वरचित
***************************
*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027, जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
याद
विधा-गीत
*************************
सम मात्राभार-21
**********
याद सताती है,बड़ा तड़पाती है,
ख्वाब दिल में बनकर, मन हर्षाती है।
याद सताती........................
आए थे जिंदगी में, मिला था शकुन,
सजाये थे ख्वाब बड़े, दिल में चुन चुन,
अब चले गये, दर्द में छोड़ गये हो,
तन्हाई सताकर, याद दिलाती है,
याद सताती है..........................
मन बेचैन हुआ, दिल हुआ अब उदास,
दिल की धड़कन बढ़ी, रुक गया है सांस,
लोग देख देखकर, उड़ाते उपहास,
दिलों की धड़कन, बस याद दिलाती है,
याद सताती है...........................
फूलों को देख , चेहरा आया याद,
भंवरों की गूजन, कर रही फरियाद,
उफ! यह मौसम भी,बन गया जल्लाद,
कलियों की मुस्कान, आग लगाती है,
याद सताती है...........................
याद सताती है,बड़ा तड़पाती है,
ख्वाब दिल में बनकर, मन हर्षाती है।
याद सताती........................।।






No comments:
Post a Comment