जरा सुनो
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विषय- उत्तर प्रदेश में बढ़ता आपराधिक ग्राफ और सरकार मौन
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उत्तर प्रदेश में अपराध के लिए सरकार दोषी हे। उचित अनुशासन अभाव में आए दिन घटनाएं घट रही हैं।
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-दोहे
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मिलन हुआ जब वीर से, खूब बढ़ाया ज्ञान।
सरहद पर बलिदान दे, बनती तब पहचान।।
पिया मिलन की आश में, बीती सारी रैन।
मन की चाहत अधर मेें, नहीं पड़े अब चैन।।
मिलन रहे दिन रात का, लगे बिछुडऩा दर्द।
कठोर दिल अपना बना, जीते हैं कुछ मर्द।।
नहीं मिलन में जब खुशी, दोस्ती है बेकार।
दर्द जहां मिलना लगे, नहीं वहां पर प्यार।।
मिलन की घड़ी हो बड़ी, कहते आये लोग।
पास किसी के जब रहो, दिल के मिटते रोग।।
साँवरे की बंसी
विधा-कविता
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साँवरे की बंसी ने कर दिया कमाल,
राधा गाये गान, मीरा का पूछा हाल,
जब जब बजी बंसी दुश्मन बदहाल,
हर जन के मुख पर नाम है गोपाल।
साँवरे की बंसी गाये, कौरव विनाश,
चुन चुन के मारे,जिन्हें झूठा विश्वास,
हो गया भला उनका, जो आये पास,
मुरली धुन ने दुष्ट किया पल में नाश।
साँवरे की बंसी गाये मधुर मधुर गान,
द्वापर युग में कहे उचित ना अभिमान,
जनहित का काम कर बढ़े गड़ाई मान,
भूल से नहीं करना किसी का अपमान।
साँवरे की बंसी कहे पाना गुरु से ज्ञान,
कभी नहीं है करना बड़ों का अपमान,
संदीपन ऋषि शिक्षा पाकर बने गोपाल,
पांचजन्य राक्षस मारा,हो जग पहचान।
साँवरे की बंसी दे रही, जग को पैगाम,
एकता और भाईचारा,होता जग में नाम,
एक बनो नेक बनो, बीते ये सुबह शाम,
इंसान का जीवन लगे, जैसे पवित्र धाम।
साँवरे की बंसी कहे, कंस तेरा हो नाश,
अपनी बहन का दुश्मन तू,आया न रास,
अच्छा हो गन जा, दाता का तू भी दास,
वरना एक दिन आयेगा नहीं, तुझे सांस।
साँवरे की बंसी पुकारे, यमुना तट रास,
गोपियां संग राधा आये, करे पाप नाश,
नीले नभ के नीचे सजे,अलौकिक गान,
सोलह कला अवतारी, आये प्रभु काश!
साँवरे की बंसी पुकारे, मथुरा कारावास,
बंदीगृह के ताले टूटे, रक्षक पड़े हैं पास,
वासुदेव का सूप बने, श्रीकृष्ण का वास,
गोकुल की गलियां भी, मनोहरी आभास।
साँवरे की बंसी कहे, कुरुक्षेत्र में आओ,
देखों महाभारत के युद्ध का होता संहार,
लाखो सैनिक मारे गये,गांडीव की टंकार,
दुश्मनी कौरव पांडव, बढ़ा फिर से प्यार।
साँवरे की बंसी कहे,देखों यशोदा दुलार,
वासुदेव और देवकी का, ऋण है उधार,
बाल लीलाओं के दर्शन करो अब तैयार,
माखन की चोरी देखो, करे कृष्ण मुरार।
साँवरे की बंसी कहे, सुनो गीता का पाठ,
अन्तर्मन में समाहित करो,हो जाए उद्धार,
बलराम संग कृष्ण देखों, भाई-भाई प्यार,
जीवन मरण बंधन कटे, हजारों एक बार।।
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विधा-कविता
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काश! इस जग में,
बालक जाये स्कूल,
बर्तन,भांडा छोड़ दे,
पढऩा करे वे कबूल।
कोई अनपढ़ न रहे,
नहीं हो बाल शोषण,
सभी खुश होके पढ़े,
पौष्टिक मिले पोषण।
जाये स्कूल हंसकर,
हंसते हुये घर आये,
शिक्षा पाकर दिनरात,
देश का नाम बढ़ाये।
शिक्षा बिना शून्य है,
बूढ़ा हो या बालक,
शिक्षा पाना सरल है,
रक्षा करे वो पालक।
शिक्षा की बयार बहे,
तन-मन भीगे मानव,
शिक्षा पाकर देव बने,
बने नहीं कोई दानव।





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