Thursday, October 15, 2020

मर्यादा
वधा-तांका
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शब्द- 5+7+5+7+7
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1
मर्यादा जब
मिलती घर घर
ना कोई डर
बोलना हर हर
यही रहे अमर।
2
बढ़ती रहे
जगत में मर्यादा
यही इरादा
करना यही वादा
थोड़ा हो या हो ज्यादा।
3
जब घटती
जग जन मर्यादा
मन हो आधा
जिंदगी है बढ़ती
बुराई वो घटती।
4
मर्यादा जग
फैलती ही जाएगी
ये हर्षायेगी
नहीं ये दुखाएंगी
वो खेल दिखाएंगी।
5
मर्यादा रहे
जगत में अटल
सच्चा है हल
सोचते पल पल
कर लेना अमल।
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यादें
विधा-क्षणिकाएं
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      1
दिल में यादें उमड़ रही,
उमड़ रहा है दोस्त प्यार,
यादों के सहारे जिंदा है,
जीवन में नहीं माने हार।।
      2.
देखी तस्वीर उसकी तब,
कितनी ही यादें उड़ पड़ी,
बेसहारा छोड़ कर गई वो,
कैसी मनहूस थी वो घड़ी।।
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मर्यादा
तांका
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शब्द- 5+7+5+7+7
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1
मर्यादा जब
मिलती घर घर
ना कोई डर
बोलना हर हर
यही रहे अमर।
2
बढ़ती रहे
जगत में मर्यादा
यही इरादा
करना यही वादा
थोड़ा हो या हो ज्यादा।
3
जब घटती
जग जन मर्यादा
मन हो आधा
जिंदगी है बढ़ती
बुराई वो घटती।
4
मर्यादा जग
फैलती ही जाएगी
ये हर्षायेगी
नहीं ये दुखाएंगी
वो खेल दिखाएंगी।
5
मर्यादा रहे
जगत में अटल
सच्चा है हल
सोचते पल पल
कर लेना अमल।
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यादें
विधा-क्षणिकाएं
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      1
दिल में यादें उमड़ रही,
उमड़ रहा है दोस्त प्यार,
यादों के सहारे जिंदा है,
जीवन में नहीं माने हार।।
      2.
देखी तस्वीर उसकी तब,
कितनी ही यादें उड़ पड़ी,
बेसहारा छोड़ कर गई वो,
कैसी मनहूस थी वो घड़ी।।







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