Sunday, October 11, 2020

दोहा छंद

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उसकी आँखों ने कहा, मुझे देश सेे प्यार।
कुर्बानी अगर चाहिए, नहीं करूं इंकार।।..2।

नहीं इंकार कर्म से, मां का कर्ज उधार।
मातृभूमि से मैं करूं,रात दिन सदा प्यार।।..4।

प्यार देश में यदि बढ़े, मिटे जगत से बैर।
उसकी आंखों ने कहा, प्रभु रखते हैं खैर।।.6।


उसकी आँखों ने कहा, मुझे देश सेे प्यार।
कुर्बानी अगर चाहिए, नहीं करूं इंकार।।

नहीं इंकार धर्म से, मां का कर्ज उधार।
मातृभूमि से मैं करूं,रात दिन सदा प्यार।।

प्यार देश में यदि बढ़े, मिटे जगत से बैर।
उसकी आंखों ने कहा, प्रभु रखते हैं खैर।।


दोहा***********************

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मात पिता की भावना, बच्चों से हो प्यार,
सेवा करते रात दिन, कभी न माने हार।।

मात पिता आराधना, गुरु का कर सत्कार।
वाणी में हो मधुरता, मिले जहां का प्यार।।

करो अनुकरण संत का, सच्चा गुरु का ज्ञान।
मात पिता के नाम को, जग में दो पहचान।।




नवरात्रे 

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नौ रूपों में पूजा होती
कहलाती मां जगदंबा
मां की पूजा सलिल है
लगती वो पावन गंगा,
नौ दिन व्रत करते जन
तन से खत्म पूर्व अन्न
नया अन्न फिर धारण
पवित्र बनता तन-मन,
सृष्टि का निर्माण करती
कहलाती जग की मां
जो मांगों वो मिलता है
उनके मुख से कभी ना,
कोई साथ नहीं देता तो
सदा ही देती है मां साथ
हर घड़ी में साथ निभाए
सदा रहता सिर पर हाथ।
लड़कियां घटी-
लड़कियां घट गई हैं
कंजक ढूंढे  ना मिले
नवरात्रे पूर्ण  हो कैसे
मन के बाछे ना खिले,
खाना  खिला रहे जन
कंजकों को स्कूलों में
खानाबदोश नहीं मिले
पड़े पेड़ों की  शूलों में,
नवरात्रों पर हो जरूरत
शेष वक्त हो अत्याचार
भ्रूूण हत्या कर मार देते
लड़की से कैसा प्यार?
आएगा  लौटकर वक्त
लड़की की हो जयकार
लड़कों की भांति होगा
लड़कियों से भी दुलार।
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नेता
विधा-कविता
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वो हाथ जोड़े आता,
वोट उसको लुभाता,
कुर्सी का चक्कर बुरा,
यह दिनरात सताता।

वोट की खातिर रोये,
घडिय़ाली आंसू देख,
हमदर्दी उपजती मन,
वोट दे देते जन अनेक।

वोट मिले बढ़ता तुर्रा,
मिलने में करता नखरे,
काम करवाना कठिन,
बन जाते कई लफड़े।

इनसे दोस्ती होती बुरी,
दुश्मनी भी नहीं ठीक,
ये तो खरे नेता ठहरे हैं,
इनसे हरदम लो सीख।
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आत्महत्या
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4 मिनट में कर रहा






एक,
आत्महत्या भारत की दर,
आत्महत्या बड़ा पाप है,
क्यों नहीं भजता हर-हर।

युवकों में बढ़ गई प्रवृति,
बात बात पर होते नाराज,
दंगा, फसाद घर में करते,
तबियत मिलती है नौसाज।

आत्महत्या बड़ा अपराध,
फिर भी करते रहते लोग,
कलंक समाज का कहाए,
बढ़ रहा है समाज में रोग।

चीन के बाद भारत आगे,
आत्महत्याएं बढ़ती जाएं,
30 वर्ष तक अधिक करे,
अनमोल तन को बचाए।

पीने को जल,जूस,अमृत,
युवा पीते,कीटनाशी दवा,
दर्द में जी रहे आज युवा,
उनके लिए कर लो दुआ।

इसके बाद नंबर दो पर है,
जो लगाते अपने को फांसी,
घरेलू कलह, तनाव बना है,
सुन सुनकर आती है हाँसी।

है वक्त बचा लो जीवन को,
वक्त जग में बड़ा अनमोल है,
एक बार मिलता जन जीवन,
यही तोल-मोल का, बोल है।

समझाओ युवा वर्ग को अभी,
क्यों करते हैं विनाश अकारण,
जीवन की कीमत, समझा कर
आत्महत्या का ढूंढों निवारण।

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