Friday, October 16, 2020

 
आइना देखकर कहते हैं
मुक्तक
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आइना देखकर कहते हैं, हम तो जवान हैं।
पड़ते गिरते चल रहे, तब लगते बेजान हैं।।
फास्ट फूड ने युवकों की,कर डाली है दुर्गत,
खान पान,सभ्यता संस्कृति, भारत की शान हैं।।
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नवरात्रि
विधा-कविता
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नवरात्रे
नौ रूपों में पूजा होती,
कहलाती मां जगदंबा,
मां की पूजा सलिल है,
लगती वो पावन गंगा।

नौ दिन व्रत करते जन,
तन से खत्म पूर्व अन्न,
नया अन्न फिर धारण,
पवित्र बनता तन-मन।

सृष्टि का निर्माण करती,
कहलाती जग की मां,
जो मांगों वो मिलता है,
उनके मुख से कभी ना।

कोई साथ नहीं देता तो,
सदा ही देती है मां साथ,
हर घड़ी में साथ निभाए,
सदा रहता सिर पर हाथ।

लड़कियां घटती जा रहीं,
कंजक ढूंढे भी नहीं मिले,
नवरात्रे अब पूर्ण हो कैसे
मन के बाछे भी ना खिले।

खाना खिलाने जाते जन,
कंजकों ढूंढते स्कूलों में,
खानाबदोश भी ना मिले,
पड़े पेड़ों की वो शूलों में।

नवरात्रों पर हो जरूरत,
शेष वक्त हो अत्याचार,
भ्रूूण हत्या कर मार देते,
लड़की से कैसा प्यार?

आएगा वो लौटकर वक्त
लड़की की हो जयकार,
लड़कों की भांति होगा ,
लड़कियों से भी दुलार।
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नवरात्रि
विधा-कविता
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नवरात्रे

नौ रूपों में पूजा होती,
कहलाती मां जगदंबा,
मां की पूजा सलिल है,
लगती वो पावन गंगा।

नौ दिन व्रत करते जन,
तन से खत्म पूर्व अन्न,
नया अन्न फिर धारण,
पवित्र बनता तन-मन।

सृष्टि का निर्माण करती,
कहलाती जग की मां,
जो मांगों वो मिलता है,
उनके मुख से कभी ना।

कोई साथ नहीं देता तो,
सदा ही देती है मां साथ,
हर घड़ी में साथ निभाए,
सदा रहता सिर पर हाथ।

लड़कियां घटती जा रहीं,
कंजक ढूंढे भी नहीं मिले,
नवरात्रे अब पूर्ण हो कैसे
मन के बाछे भी ना खिले।

खाना खिलाने जाते जन,
कंजकों ढूंढते स्कूलों में,
खानाबदोश भी ना मिले,
पड़े पेड़ों की वो शूलों में।

नवरात्रों पर हो जरूरत,
शेष वक्त हो अत्याचार,
भ्रूूण हत्या कर मार देते,
लड़की से कैसा प्यार?

आएगा वो लौटकर वक्त
लड़की की हो जयकार,
लड़कों की भांति होगा ,
लड़कियों से भी दुलार।
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