मां कूष्मांडा
विधा-दोहे
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मां कूष्मांडा लग रहा, बड़ा अलौकिक रूप
ऋषि मुनि दर्शन चाहते, खड़े तैयार भूप।।
मात कृपा जिस पर रहे, बनते उनके काम।
सारी धरती पर सजे, माता का ही नाम।।
मां चाहे वो हो सदा, होती जय जयकार।
अपने भक्तों के लिये, मिले सदा तैयार।।
कूष्मांडा मां रूप है, सूरज चमक समान।
हाथों में है तीर तो, देवी जगत महान।।
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माता के दोहे
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माताएँ नौ मिल करें , हर बल का निर्माण ।
जीवन इनके बल चले , मान इन्हें ही त्राण ।
माता हे कात्यायनी , लाज तुम्हारे हाथ ।
दुष्ट बुरा अब कर रहे , भक्त जनों के साथ ।
माता तेरा आसरा , तुम से ही है आस ।
रहूँ तुम्हारी ही शरण , छह ऋतु बारह मास ।
चंद्रघंटा कहे सुनो, मानों कभी न हार।
देवी मैं अवतार लूं, कर दूं बेड़ा पार।।
मां दुर्गे की अर्चना, होती जग आधार।
माता से बढ़कर नहीं, देता कोई प्यार।।
माता दुर्गा दे मुझे , बस इतना वरदान ।
पाखंडी का मैं करूँ , पल भर में अवसान ।।
माता गौरी दीजिए , मुझको आशीर्वाद ।
कृपा आपकी से रहूँ , मैं हरदम आबाद ।।
इस जग में इंसान का, माता रखती ख्याल।
नवरात्रि पर्व मन हरे, पूछती मात हाल।।
देख सलोना रूप मां, पाप मिटे तन आज।
तीन जहां के लोक में, मां देवी का राज।।
कृपा सदा ही राखियों, विनति करूं मैं दास।
मां आशीर्वाद की, थोड़ी सी अरदास।।
तुमसे ये किसने कहा
विधा-कविता
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ताऊ आया घर पर
लेकर हाथ में छड़ी,
ताई देख रही बाट,
द्वार पर सजी खड़ी,
ताई बोली देख ले,
कितनी देरी लगाई,
ताश पीटी दिनभर,
शर्म नहीं तुझे आई,
ताऊ बोला ताई से,
चुगली किसने खाई,
ये किसने तुझे बताई।
बेलन उठा ताई ने,
कहां-मार दूंगी तेरे,
वक्त पर घर आना,
नहीं लगा कहीं डेरे,
खाना ठंडा हो गया
लाज शर्म ना आई,
आग-बबूला- ताऊ,
अपनी छड़ी, उठाई,
कहा-ताऊ ने ताई से
देर मत ना कर यहां
तुमसे ये किसने कहा?
ताऊ बोला छोड़ राड़,
क्रोध पर डाल दे बाड़,
चल घर के अब अंदर,
वरना रोटी खाये बंदर,
लगी है जोर की भूख,
क्रोध को दे अब थूक,
गर्मागर्म दूध ला परांठे,
डाल ला थोड़ी मलाई,
मेरा टेंटी अचार कहां?
ताई बोली बने परांठे?
तुमसे ये किसने कहा?
बोली ताई-ताऊ से,
बहुत सुन लिये ताने,
इस घर में ना रहूंगी,
दिल मेरा, नहीं माने,
रोज रोज के तानो से,
पड़ोस में होती हँसाई,
गाली तेरी सुन सुनकर,
इज्जत निज की बचाई,
वैसे बहुत बड़ा जहां?
पर पड़ी रहूंगी मैं यहां?
ताऊ बोला रुकना यहां,
तुमसे ये किसने कहा?
ताई के नखरे देखकर,
ताऊ ने मान ली हार,
बोला-ताऊ दे खाना,
दोनों में है बड़ा प्यार,
सुन ताऊ के वचन तो,
ताई खाना लाने तैयार,
झटपट खाना परोसकर,
बोली वो रमलू कहां?
वो छोड़ गया घर बार,
सुबह से वो नहीं यहां?
ताऊ ने पूछा घर छोड़ा,
तुमसे ये किसने कहा?
ढूंढके लाया, रमलू को,
दोनों को पास बिठाया,
ताऊ -थोड़ा मुस्कराया,
बोला प्यारी तू न हारी,
आज ये कसम हमारी,
नहीं खेलूंगा कभी ताश,
ये होती हैं घर का नाश,
मिलकर चलेंगे चांद पर,
प्लाट जब कटते हैं वहां,
ताई बोली अब तू नहां,
ताऊ-मुस्कुराकर बोला,
तुमसे ये किसने कहा?
नोक झोक मिटी दोनों,
परिवार अब लगे खुश,
पड़ोसी चाहे लठ बजे,
न लडऩे का हुआ दुख,
राड़ मिटी ताऊ हर्षाया,
सबने मिल खाना खाया,
ताई बोली तुम मेरे प्रिय,
तुम बिन नहीं जाये रहा,
ताऊ बोला फिर बोलना,
तुमसे ये किसने कहा?
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