जन्मोत्सव/सत्य/साहस
विधा-दोहे
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साहस से जब दिल भरा, हाथों से लो काम।
आगे बढ़ता जो सदा, जग में पाता नाम।
सत्य मार्ग चलना सदा, मिलता है आराम।
बुरे कर्म जो कर रहा, होगा काम तमाम।।
कहते साहस दम बड़ा, अर्जित कर लो आज।
हिम्मत से जो काम ले, करता जग में राज।।
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दोहा
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जीवटता हो काम में, जब तक प्राण शरीर।
दर्द लिये फिर घूम ले, हरे नहीं जन पीर।।
ऐसे थे बापू
विधा-कविता
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कमजोर तन, मामूली वस्त्र,
हाथ में लाठी, चलाई डांडी,
अहिंसा पुजारी, घड़ी प्यारी,
हरी पीर, ऐसे थे बापू गांधी।
सत्य पुजारी, पोरबंदर जन्मे,
बागी नौजवान,चलाई आंधी,
सिद्धांत बंधुता, लंदन पढ़ाई,
याद रहे, वही थे बापू गांधी।
अफ्रीका में, भेदभाव मिटाया,
सत्याग्रह, ब्रह्मचर्य अपनाया,
दर्द हुआ, आईएनसी बनाई,
महात्मा गांधी, नाम कमाया।
नस्ली देख,मोर्चा उन्हें खोला,
अपशब्द तो,मुख से ना बोला,
सविनय अवज्ञा आंदोलन छेड़,
अंग्रेजी शासन,यूं डगमग डोला।
1915 में वो, भारत देश आये,
आजादी का,संघर्ष तब चलाए,
नमक कानून तोड़,अंग्रेज डराये,
बिन युद्ध के,अंग्रेज मार भगाए।
छेड़ा था, भारत छोड़ों आंदोलन,
अंतिम समय हो गये अति उग्र,
करो या मरो का, नारा चलाया,
अंग्रेजी शासन, थर थर कंपाया।
1947 में देश, मिली थी आजादी,
कहलाए राष्ट्रपिता,ऐसे बापू गांधी,
पूरा नाम मोहनदास कर्मचंद गांधी,
151वीं जयंती पर,नमन बापू गांधी।
4 जून 1944, सुभाषचंद्र बोस ने,
सिंगापुर रेडियो स्टेशन,पैगाम दिया,
राष्ट्रपिता संबोधन करके, गांधी को,
महात्मा गांधी एक नया नाम दिया।
रविंद्रनाथ टेगोर,दिया महात्मा नाम,
बापू गांधी की आत्मा जगत महान,
चरखा सूत कातते, ऐसे बापू गांधी,
देशी कपड़ों की, चलाई थी आंधी।
चंपारन जिले के किसान आंदोलन,
राजकुमार शुक्ला, शब्द चित चढ़ा,
बापू शब्द किया था, संबोधित तब,
महात्मा गांधी का, बापू नाम पड़ा।
बापू,राष्ट्रपिता,महात्मा,कर्मचंद भी,
गांधी के ही, कहलाते सभी नाम,
ऐसे थे बापू गांधी, जग के मसीहा,
पुकारता महात्मा उन्हें जग तमाम।
बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो और,
बुरा मत देखो, गांधी की पहचान,
ऐसे हुये बापू गांधी, भारत देश में,
चमक रही है अलग, उनकी शान।
आइंस्टाइन वैज्ञानिक, कहा कभी,
आने वाली नस्लें नहीं मानेंगी जग,
हाड मांस के पुतले ने दी आजादी,
अजग गजब कहे राष्ट्रपिता गांधी।
कस्तूरबा गांधी, पत्नी का था नाम,
महात्मा गांधी पुकारते थे उन्हें बा,
ऐसे थे बापू गांधी,करते काम सदा,
हिम्मत देखो गांधी,कभी निकला ना।
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जन्मोत्सव/सत्य/साहस
कविता
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साहस भरा दिल कभी,
हिम्मत से बनते काम,
एक दिन ऐसा आएगा,
होगा जगत फिर नाम।
सत्य अहिंसा पर चले,
महात्मा गांधी था नाम,
अंग्रेज भगाए बिन लड़े,
ऐसा कर गये वो काम।
कितने ही जगत में हुये,
साहस नहीं जन छदाम,
चले गये जगत से सभी,
कायर पड़ा उनका नाम।
सत्य पर जो अडिग है,
कोई सके, नहीं हराय,
हिम्मत, बल,बुद्धि का,
पाने करो सदा उपाय।।
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