दोहा ********************
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हार जीत वो खेल हैे, समझों जिसको ख्वाब।
जीत कभी हासिल करे, उभरे तन पर आब।।
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जरा सुनो
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विषय- एक नागरिक का समाज के प्रति कर्तव्य
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एक नागरिक को समाज के हर सुख दुख में शरीक होकर हर सामाजिक भावना का निर्वहन करना चाहिए।
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हार जीत
दोहे
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हार जीत के मायने, होते सदा खराब।
जीत गया वो समझता, अच्छी बड़ी शराब।।
हार जीत हो एक की, जब चलता है खेल।
हार गया वो दौड़ता, ज्यों चलती है रेल।।
हार जीत वो खेल हैे, समझों जिसको ख्वाब।
जीत कभी हासिल करे, उभरे तन पर आब।।
मुलाकात
विधा-कविता
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मुलाकात होती अपनों से
आपस में मिलते हैं दिल,
मन खुशी से भर जाता है
बदन फूल सा जाये खिल,
मुलाकात हो अंजान जब,
कितने प्रश्न आपस में हो,
तब जाकर निष्कर्ष निकले,
क्या करता, कौन जन वो।
मुलाकात जब कैदी से हो,
डर मन को बहुत सताता,
बुरे कर्म कभी नहीं करना,
वरना ऐसा दौर भी आता।
मुलाकात हो बड़े आदमी,
मन रहता लंबे समय खुश,
अंतिम मुलाकात हो कभी,
फिर तो मन को मिले दुख।
मुलाकात पत्नी से होती है,
चेहरे पर आते अनेक भाव,
कभी घर की याद आती है,
कभी किसी पर आता ताव।
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सरहदें
विधा-कविता
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सरहदों पर जा रहे वो,
भाईचारे का ले पैगाम,
कुर्बानी अगर देनी हो,
मिलते खड़े वीर तैयार।
सरहदों पर हो रहा है,
दुश्मनी जैसा व्यवहार,
आवश्यकता है देश में,
बढ़े एकता और प्यार।
सरहदों पर जा सैनिक,
करते हैं देश की सुरक्षा,
एकता में बंधकर रहते,
देते रहते हर जन शिक्षा।
मातृभूमि की रक्षा करने,
जाते हैं वीर देश जवान,
भारत के जन याद करते,
ऐसी है उनकी एक शान।
सरहदों पर न हो अगर,
खून खराबे का वो मंजर,
करे दुआएं दाता से अब,
नहीं चले बम और खंजर।
अभिमान
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अभिमान बुरा संसार में,
गिरा देता पल में इंसान,
थू-थू करेगा जग उसको,
नहीं रहे समाज में शान।
अभिमान का, नीचा सिर,
कहती आया सदा समाज,
झुकने का सामथ्र्य जिसमें,
वो जन करे जन पर राज।
अभिमानी रावण का देखो,
मिट्टी में मिल गई थी शान,
झुकने की कला ध्रुव भक्त,
पूरे जगत में बनी पहचान।
अभिमान कभी मत करना,
कह गये कई देश के संत,
घमंड किया वो जग दुखी,
एक दिन हुआ बुरा अंत।।





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