चलो इश्क की पतंग उड़ाये
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विधा-कविता
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चलो इश्क की पतंग उड़ाये,
हँसते गाते जहां से पार जाये,
हरेक शाम प्यार के गीत गाये,
हसीं जीवन का लुत्फ उठाये।
चलो इश्क की पतंग उड़ाये,
उन्मुक्त गगन तले यूं हँसाये,
सारे दुख दर्द को दूर भगाये,
खुद सुने, दूसरों को सुनाये।
चलो इश्क की पतंग उड़ाये,
प्यार की हवा में उड़ते जाये,
निज भावों को उनको सुनाये,
दिल को दिल के पास लगाये।
चलो इश्क की पतंग उड़ाये,
चंदन भांति हम महक जाये,
अपने सपने सारे ही सजाये,
धर्म कर्म में बस नाम कमाये।
चलो इश्क की पतंग उड़ाये,
एक दूजे को हम समझ पाये,
सुख सपनों में हम खो जाये,
पेच लड़े तो दोनों कट जाये।
चलो इश्क की पतंग उड़ाये,
अपने जीवन का सार सुनाये,
छोटे सा जीवन लो महकाये,
नहीं किसी से धोखा खाये।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
आदर
विधा- छंदमुक्त कविता
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आज नहीं कहीं आदरमान,
आज नहीं है जन पहचान,
आज का दौर बहुत बुरा है,
पी रहे देखो भांग, सुरा है।
मात पिता अब रोते हैं सारे,
छोड़ गये लाडले जो प्यारे,
मां बहनों की घटी है इज्जत,
बहन भाई की हो गई दुर्गत।
बड़े -बूढ़ों का नहीं है मान,
साधु संत का बढ़ा अपमान,
देखे वहीं हो हाथा पाई जन,
ज्ञानी होकर हो चुके अज्ञान।
आज कदर है बिल्ली व कुत्ता,
आज कदर है साला व साली,
आज कदर है ससुर और सास,
आज कदर है पत्नी चाहे काली।
कितना बदल गया यह संसार,
कितना बदल गया जग प्यार,
कब आएगा रामराज्य का युग,
कब जायेगा आज का कलियुग।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400



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