Thursday, April 07, 2022

                         कात्यायनी
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विधा-कविता
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मां का छठवां रूप सुहाना,कात्यायनी कहाती है।
दुखिया भक्त जप करता, सारे कष्ट दूर हटाती है।
दुश्मन भी थर थर कांपे, मां जब आती गुस्से में,
पतित, शरणागत भक्तों को, गले से लगाती है।

कात्यायन ऋषि तप किया, पुत्री रूप मिली थी,
प्रसन्न हुये अपार ऋषि, मन कलियां खिली थी।
कात्यायन के घर पैदा हुई, कात्यायनी कहलाई,
दुष्ट दलन कर डाला, भक्तों ने मन छवि बसाई।

चार भुजाएं धारती, एक हाथ में मिले तलवार,
महिषासुर भी नहीं बचे, किया जब उनपे वार।
शुंभ निशुंभ मारकर, भक्तों को भी दिया था चैन,
देख शेर की सवारी, दुष्ट हो चले थे सब बेचैन।।

महिषासुरमर्दिनी नाम पड़ा मां, ओज तेज भरपूर,
देख छवि मां की कभी, उपज रहा  है तन नूर।
अभयमुद्रा में मां मिले, नाम पड़ा है कात्यायनी,्र
दुश्मन शक्तिहीन हुये, मिटा दिया उनका गुरूर।।



माता का यह रूप निराला, नौ रूपों में मिलती है,
उनकी मर्जी के बिना, पत्ती तक नहीं हिलती है।
नमन करें उस माता को,जो करती जग बेड़ा पार,
उनकी शरण के बिना मान लो,होगी जग में हार।

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स्वरचित/मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400




कात्यायनी
विधा-मनहरण घनाक्षरी
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कात्यायन के पैदा हो,कात्यायनी पड़ा नाम।
दुष्टों का संहार किया, नमन मां कीजिये।।

अभय मुद्रा में मिले, एक हाथ तलवार।
चार भुजा सज रही, बड़ा जग नाम है।

महिषासुर को मारा, शुंभ निशुंभ उद्धार।
भक्तों को मा लुभा रही, शेर की सवार है।


तीन लोक पूजा होती, छवि बड़ी निराली है।
ऐसी मां को नमन है, आशीर्वाद लीजिये।।

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स्वरचित/नितांत मौलिक
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*डा होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400



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