पथ
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विधा-मुक्तक
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पथ पर चलना ठीक है, कुपथ चलो बदनाम।
धर्म कर्म के बल सदा, होता जन का नाम।।
नहीं अगर तन मानता, कहलाता अज्ञान,
परहित में जीवन चले, वो जन कहो महान।।
दूर तलक जब सामने, पथ का दिखता राह।
मंजिल पर जाते सभी, जिनकी होती चाह।।
लालच जग में हो बुरी, दे जाती है दर्द,
संमार्ग पर जब चले, निकले मुख से वाह।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
चलभाष-09416348400
कविता
तप
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तप के बल पर नाम कमाते,
कितने जगत के साधु संत।
ज्ञान विज्ञान से भर जाते हैं,
शक्ति तप की होती अनंत।।
तप के बल पर पा जाते हैं,
नाम अमर हो जाता जगत।
बिना त्याग तपस्या के ही,
बन जाती है जन की दुर्गत।।
भागीरथ जब तप किया तो,
गंगा को धरा पर लाया था।
पितरों का उद्धार किया तब,
पूरे विश्व में नाम कमाया था।।
छह माह सरस्वती में तप से,
शिव भोले को मिली शक्ति।
ज्ञान विज्ञान से बढ़कर होती,
कहलाती तप की ही भक्ति।।
कच्चा रह जाये तप से तो,
नहीं पा सकता जग नाम।
तपस्या से प्रसन्न हो जाते हैं,
राम कहो या कहते श्याम।।
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मौलिक/स्वरचित
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*होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 1, मोहल्ला मोदीका
कनीना -123027
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
09416348400




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