मां चंद्रघंटा
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विधा-कविता
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मां का तीजा रूप सुहाना, चंद्रघंटा कहलाती है,
अपने भक्तों पर कृपा कर,निज गले से लगाती है,
सदाचार,त्याग,संयम, कई गुणों से भरी हुई माता,
कष्टों में सदा सहायक, हर वक्त भक्त हँसाती है।
मस्तक पर अर्ध चंद्र हैं, दस भुजाएं मिलती हैं,
शरण में आ जाओ,मन की कलियां खिलती हैं।
भय,नकारात्मक भाव खत्म,ऐसा मां का हो रूप,
जब मां क्रोध में आती, धरती भी तब हिलती है।
पार्वती का रोद्र रूप है,शेरों की करती है सवारी,
कुंदन सा शरीर चमकता,कभी नहीं जग में हारी,
त्रिशूल,गदा, तलवार,कमंडल,रखती अपने पास,
युद्ध मुद्रा में मिलती है, कहलाती है शिव प्यारी।
जपमाला हाथ लिये, अभय मुद्रा में मिलती है,
तीसरे दिन करते पूजा,समस्या हल निकलती है।
नौ रूपों में यह रूप सुहाना, कहतेे हैं देव संत,
पापों का विनाश कर,राक्षसों को वो दलती है।।
जीवन में साहस भर दे, हर गम खुशी कर दे,
दूध से बनी वस्तुएं प्रिय,कटोरा मां को धर दे,
हर प्राणी बस प्रसन्न होता, ऐसा देती वरदान,
सही ढंग से गर पूजा करे तो,भक्त को वर दे।।
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स्वरचित/मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
चंद्रघंटा
विधा-मनहरण घनाक्षरी
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शोभित करता रूप मां, चंद्र घंटा सिर धार।
भक्त वत्सल है बड़ी, शर
ण अभी आइये।।
अष्ट भुजा धारण करे, दुश्मन जाते हैं कांप।
शक्ति रूप में जानते, आशीर्वाद लो पाइये।।
विश्व कल्याण वो करे, भक्तों के संताप हरे।
आराधना से मिट जाते, दुखड़े तो सुनाइये।।
नौ रूपों में मिले, चंद्रघंटा भी एक रूप।
शाम सवेरे रट सदा, मन मंदिर बसाइये।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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*डा होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400



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