Wednesday, April 06, 2022

 स्कंदमाता
विधा-मनहरण घनाक्षरी
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दिया जन्म स्कंद बाल, हुआ जग उद्धार।
चार भुजा दुष्ट मारे, मां दरबार सजे ।।

एक हाथ तीर सजे, दूजे हाथ स्कंद बाल।
कमल आसन होता, मूरत सुंदर मां।।


शेर सवारी मां करे, थर थर कांपे दुष्ट।
महिमा है जगत में, नमन तो कीजिये।।


ओज तेज तन भरा, हो जब शेर सवार।
भक्तजन उद्धार हो, नमन तो कीजिये।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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*डा होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400



स्कंदमाता
विधा-कविता
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मां का पांचवां रूप सुहाना,स्कंद मां कहाती है।
दुखिया भक्त जप करता, सारे कष्ट दूर हटाती है।
दुश्मन भी थर थर कांपे, मां जब आती गुस्से में,
पतित, शरणागत भक्तों को, गले से लगाती है।

स्कंद को मां जन्म दिया, किया जग का उद्धार,
शेर सवारी वो करती, नमन करो मां को हजार।
कमल आसन्न है मां का, हाथ में रखती है तीर,
हर भक्त को मिलता बड़ा, मां का देखो प्यार।।

चार भुजाएं, स्कंद बाल, स्कंद लिये वो मिलती,
तीर से घायल दुष्ट हो, सिंह सवारी धारण माता,
सृष्टि की रचना कर डाली, पद्मासन कहलाती है,
हर प्राणी उनकी शरण में, उनसे मिले बड़ा नाता।

माता का यह रूप निराला, नौ रूपों में मिलती है,
उनकी मर्जी के बिना, पत्ती तक नहीं हिलती है।
नमन करें उस माता को,जो करती जग बेड़ा पार,
उनकी शरण के बिना मान लो,होगी जग में हार।

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स्वरचित/मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400





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