सिद्धिदात्री
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विधा-कविता
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नौंवा रूप मां का सुहाना,
ओज तेज से है भरा हुआ,
देखकर मां का रूप दुर्जन,
थर थर कांपे मांगते दुआ।
सभी देवी देवताओं से ही,
सिद्धिदात्री रूप प्रकट हुआ,
भक्तजन देख प्रसन्न होते हैं,
मन से मांगे उनसे ही दुआ।
अनेक सिद्धियों से परिपूर्ण,
मात का रूप निराला होता,
सारे पाप पल में मिट जाते,
दर्शन कर प्रसन्नचित जीता।
सिंह की सवारी करती मां,
हाथ में गदा,चक्र,पुष्प मिले,
एक बार जो प्राणी देख ले,
मन के सारे बाछे ही खिले।।
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मौलिक एवं अप्रकाशित
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
विधा-कविता
सोच
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सोच बड़ी इंसान की, मन को देती द्वंद्व,
उल्टी सीधी सोच रखे,मिलते लोग चंद।
सही सोच मन में रखे, बनते सारे काम,
बुरी सोच पाप सम, ऐसी सोच करो बंद।।
एक बात के निकालते,जन अनेकों अर्थ,
उल्टी सोच अगर दिल में, होता है अनर्थ।
आपस में जब बहस हो, खुलते जाते भेद,
सही अर्थ अपनाते नहीं, निश्चित जाना गर्त।
एक से बढ़कर एक हैं,जग में लोग विद्वान,
पर उन लोगों की कमी नहीं,होते हैं अज्ञान।
ज्ञान और तर्क के बल,बनता जन है महान,
सही ज्ञान के उपयोग से, बढ़ती जन शान।।
सुविचार दिल में पले, सकारात्मक ले मान,
कुविचार दिल में पले, नकारात्मक ले मान।
विचारों में हो तोडफ़ोड़, वो होता है अज्ञान,
सही अर्थ धारण करे, लेना यही जग संज्ञान।।
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मौलिक एवं अप्रकाशित
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* होशियार सिं
ह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400


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