बूढ़ा तालाब
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विधा-कविता
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बूढ़ों की अब कद्र नहीं, कह गये कितने संत,
यही वजह समाज में, संस्कृति का हुआ अंत।
बुजुर्गों की जहां कद्र मिले, वो देश हो हमारा,
हर बूढ़ा जीवन जीये, देखे सैकड़ों ही बसंत।।
बूढ़ा जन बूढ़ा बैल,करते नहीं जब कोई काम,
फर्ज हमारा सेवा करना, होगा जगत में नाम।
इनकी सेवा नहीं करे तो, लगता बहुत ही पाप,
बेहतर सेवा जब कर दे तो, पहुंचे स्वर्ग धाम।।
बूढ़ा तालाब अगर हो जाए, कीचड़ जाये जम,
पानी बहुत कम रोक पाता, होता है बड़ा गम।
पर बूढ़ा हो जाये तालाब, देखरेख का है फर्ज,
बहुत दिनों जल पिलाया,सिर पर होता है कर्ज।
बूढ़ा तालाब यह कह रहा,कुछ तो सोच इंसान,
भूल गया क्यों मुझको, कभी थी मेरी पहचान।
हर जीव बूढ़ा होता है, प्रकृति की होती शान,
संस्कृति यह कहती है, सेवा से बने जन महान।।
रो रहा है तालाब आज, कैसी दुर्गत बना डाली,
कभी ठंडे पानी लबालब,आज हो चुका खाली।
एक दिन सबको बूढ़ा होना, देख रहा है माली,
जिस दिन बेकद्री हो तुम्हारी,तब बजाना ताली।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
अच्छी बात नहीं
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विधा-कविता
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किसी का दिल दुखाना,अच्छी बात नहीं,
किसी से दिल लगाना, अच्छी बात सही।
दर्द में डूबे इंसान को,सहारा देना ठीक है,
पर परहित करने वाले, ढूंढे मिले न कहीं।
किसी का धन छीनना, अच्छी बात नहीं,
किसी को ज्ञान बांटना,अच्छी बात कही।
चूस लेते हैं कुछ जन गरीबों का खून भी,
बेचारे गरीब की आंखों से अश्रु धार बही।।
किसी की चुगली करना,अच्छी बात नहीं,
किसी को गाली देना भी,अच्छी बात नहीं।
लोग पीठ पीछे घोंप देते हैं, जन के खंजर,
लोग चले जाते हैं, बातें रह जाती हैं वहीं।।
अच्छी बात नहीं है,धन खोने पर रोते लोग,
धन लालसा इंसान की, होता है बड़ा रोग।
धन की खातिर जान देते और ले लेते कभी,
जो कुछ मिला प्रभु दिया, लगा लेना भोग।।
अच्छी बात नहीं, किसी की कमी निकाले,
अपनी गलती देख,दिल करो प्रभु के हवाले।
परछिद्रान्वेषी कभी जग नहीं होते हैं सफल,
अपनी आत्मा को पापों से ही अब बचा ले।।
बच्चों को ज्ञान ना देना, अच्छी बात नहीं है,
हर बालक को स्कूल भेजे,ये कथन सही है।
बच्चों को उत्तम शिक्षा खातिर लगा दो जोर,
शिक्षा गहना है,किसी शायर ने बात कही है।।
मात पिता व गुरु दोष देना,अच्छी बात नहीं,
उनकी तो बस सेवा करो,कहलाती बात सही।
मात पिता गुरु ठुकरा दे, कहीं नहीं मिले ठोर,
एकलव्य जैसे शिष्य मिलते नहीं ढूंढे से कहीं।।
पाप कर्म अहित करना,अच्छी बात नहीं होती,
धर्म कर्म पर चलना ही,कहलाता है जग मोती।
सत्यमार्ग पर चलने से, मिट जाते हैं सभी पाप,
गलत मार्ग पर चलकर तो,रोज ही दुनिया रोती।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह याद
व
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400


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