Monday, April 11, 2022

                      मर्यादा

*********************

**********************

********************
विधा-कविता   
*****************

धर्म कर्म पर टिका हुआ, मर्यादा जग रूप,
टिके नहीं मर्यादा पर, कितने हुये रंक भूप।
पूरे जगत में नाम बड़ा, श्रीराम कहलाते हैं,
मर्यादापुरुषोत्तम नाम, जन जन में कहाते हैं।।

विचलित नहीं हुये कभी,रहे सदा एक सम,
हजारों लाखों सुख मिले, लाखों आये गम।
पर मर्यादा पर अटल रहे, श्रीराम में था दम,
लेशमात्र विचलित नहीं, चाहे हों आंखें नम।।


मिलने वाला राजपाट,पल में मिला वन गमन,
नहीं हुये वो विचलित जरा,वन बनाया चमन।
श्रीराम की जय बोलते, कर रहे देव भी नमन,
यूं मर्यादा पर टिके वो, दुष्टों का किया दलन।।

भरत ने चाहा देना राज, पर कब राम मानते,
मर्यादा क्या चीज होती, श्रीराम यहीं जानते।
राजपाट भी नहीं सुहाया,दे डाला पैर खड़ाऊं,
दिया वचन नहीं फिरते,श्रीराम यह पहचानते।।

मर्यादा पर अटल रहे वो,मारा बाली को तीर,
राजपाट सुग्रीव दिलाया, हर ली पल में पीर।
अंगद को दिया स्नेह, मर्यादा का पाठ पढ़ाया,
छोटी बड़ी किसी बात पर,नहीं हुये वो अधीर।।

घात लगी जब लक्ष्मण को,रोते रहे बड़ी देर,
सुषेण वैद्य जब मना किया,मर्यादा लगी टेर।
हनुमत लाया संजीवनी, बचाये लखन प्राण,
श्रीराम नहीं जी सकते थे, लक्ष्मण के बगैर।।


भीषण युद्ध हुआ रावण संग, मर्यादा के संग,
ताउम्र यूं ही अटल रहे वो, नहीं मर्यादा भंग।
कदम कदम पर मर्यादित रहे वो, ऐसे श्रीराम,
मर्यादा नहीं तोड़ी कभी, छेड़ी हरदम ही जंग।।


सीता का त्याग किया, जमकर मर्यादा निभाई,
कभी नहीं अहित किया प्रजा,नहीं हुई हँसाई।
इंसान बदला, समय भी बदला, राम रहे शांत,
उनकी मर्यादा देख देख, छवि दिल में बसाई।।

पूरे जग में एक ही नाम, श्रीराम जग कहलाते,
मर्यादापुरुषोत्तम हैं वो,आज भी यही कहलाते।
भक्तों पर प्रेम बयार बहे,  दुष्टों का करते नाश,
सदियों तक अमर रहेंगे, मर्यादा पुरुष कहलाते।।

****************
स्वरचित/नितांत मौलिक
********************





* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


No comments: