Saturday, April 02, 2022

 हद कर दी आपने
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 विधा- कविता
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हद कर दी आपने, गरीबों का कर मजाक,
एक दिन सबको जाना है,बन जाएगी राख।
सता नहीं दिल किसी का,वरना होगी हानि,
पता लगेगा सचाई का, गिर जाए तब शाख।।


हद कर दी आपने, दुश्मन का दिया साथ,
देशभक्त पुकार रहे, बढ़ाता क्यों नही हाथ।
देश के दुश्मन कहलाते हैं, एक दिन गद्दार,
सब कुछ छीन जाएगा तेरा,हो जाए अनाथ।।

हद कर दी आपने,कष्ट में इतना क्यों रोता,
मिलता फल सदा ही, जैसा बीज है बोता।
अपनी करनी पर ही, पछताना पड़ता जरूर,
बुरे कर्म का फल मिला, आंसू नैन भिगोता।।


हद कर दी आपने, चुरा रहा काम से मन,
हिम्मत से काम लो, दिया हुआ प्रभु तन।
नहीं कभी बेकार हो,मेहनत जिसका नाम,
आगे बढ़ते जाना है, सावन हो या अगहन।।

हद कर दी आपने, पाप कर्म में तुम लीन,
सब कुछ छीन जाएगा, बज जाएगी बीन।
सत्य,प्रेम और प्यार से, बन जाते हैं अपने,
नीच कर्म करते रहने से,होना पड़े गमगीन।।

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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा






कैसे हृदय से
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विधा-कविता   
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कैसे हृदय से कहूं, जिंदगी बड़ी बेदर्द होती है,
कितनी जिंदगानियां, खड़ी चौराहे पर रोती हैं।
कभी हँसते गाते चले गये, कोई रोकर जाता है,
अफसोस कभी तो,ये मौका नहीं मिल पाता है।।

कैसे हृदय से जुदा कर दूं,मन बहुत ही रोता है,
एकांत में जब होता हूं, आंसू से नेत्र भिगोता है।
कभी पराये का,कभी अपनों का गम सताता है,
पर चेहरा सभी को, बिना बताये ही बताता है।।

कैसे हृदय से पुकारूं, वो याद बहुत आता है,
कभी सपनों में आकर के,मन को तड़पाता है।
आंखें खुल जाती है तो, वो हो जाता है फुर्र,
सपने तो सपने हैं, दिल दिल को समझाता है।।


कैसे हृदय से लगाऊं उसे, बहुत दर्द दे डाले,
ढूंढता रहा उसको वन में, पैरों में पड़े हैं छाले।
सामने जब आएगा तो,दिल को दिल पुकारेगा,
बेझिझक कह डालूंगा उसे, मेरे दिल के नाले।।

कैसे हृदय से करूं विदा,लंबा साथ निभाया है,
विदाई का क्षण बुरा, आखिर वो क्षण आया है।
नम आंखें होती,दिल में दर्द हो,रोते जुदा होते हैं,
जुदा हो गये अपने, दर्द ही दर्द हाथ आया है।।


कैसे हृदय से मांगू उससे,गरीब दिल मैं बेचारा,
धन की चाहत सभी, धन होता है बड़ा प्यारा।
साधु संत में कोई बिरला धन से दूर रह पाया,
पर क्या करूं,अब तो मांग लेता हूं बस उधारा।।

कैसे हृदय से चाहूं उसे, वो हो गई अब पराई,
खाक अगर छानते हैं तो,होती है जग में हँसाई।
कभी ऐसी मूरत सामने आती,मन तड़पता देखा,
कैसे भूला दूं रानी को, दिल में उसे बसाया है।।


कैसे हृदय से याद करूं वो होता जग रखवाला,
तस्वीर दिल में बस जाये,लगे शिव भोलाभाला।
पूरे जगत की वो दाता ही,रखता हरदम ही खैर,
लो अब कठिन वक्त में, रट लेता उसकी माला।।

कैसे हृदय से पुकारूं, माता रानी घर आ जाओ,
बहुत दुखियारा हूं मां, दर्श कभी दिखला जाओ,
कृपा तुम्हारी यूं बनी रहे,पाता रहूंगा जन में नाम,
अब तो आ जाओ घर में, मत नहीं यूं तड़पाओ।।

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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* डा. होशियार सिंह याद




मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

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