मितव्ययता
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विधा-छंदमुक्त कविता
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जितनी लंबी चादर हो, उतने पैर पसार,
अधिक खर्च कर डालोगे तो होगी हार,
मितव्ययता रूप हो इस जगत में भली,
करो मितव्ययता करेंगे जग वाले प्यार।।
आदत बन गई कुछ लोगों की जहां में,
अनावश्यक रूप से करते देखे हैं व्यय,
तुर्रा नीचे नहीं होने पर उनका जहां में,
होता है उनका बस मन में यही ध्येय।।
मितव्ययता हो देशहित, पाए जन नाम,
आर्थिक बोझ से बच जाये,सुंदर काम,
बेकार में व्यय करते रहने से बढ़ता है,
आर्थिक बोझ और हो जाएगा बदनाम।।
मितव्ययता की आदत डाल लेना जग,
देखों फिर जहां में होगा जन विकास,
जन परिवार सदा प्रसन्न मिलेंगे तुमसे,
हर जन को मितव्ययता आएगी रास।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
विवाह/शादी
विधा-कविता
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शादी बंधन दिलों का, खुशी करे इजहार,
आपस में दो दिल बंधे, दिल में हो प्यार।
सदियों से चली आई, परंपरा निभाते हैं,
एक एक दिन बंध जाते जोड़े कई हजार।।
शादी हो दिलों का प्यार, मिले नहीं उधार,
हर जन उम्र आने पर, शादी को हो तैयार।
जब दिल बंधन बंधते, रिश्ता बने अनमोल,
दोनों मुख से निकले सदा, मधुर मधुर बोल।।
मात पिता इस दिन का, करते आये इंतजार,
एक दिन रिश्ता बंध जाये, आये तब बहार।
विवाह में मिलती हैं खुशी, जाने सारा जहां,
अलग रूप में मिलता है, अलौकिक हो प्यार।।
विवाह को विवाह मानते, होते हैं वो मानव,
विवाह में खलल डालते जो, कहलाते दानव।
विवाह रूप जग से अलग, होती बड़ी परंपरा,
पवित्र बंधन को निभाना, सुन ले है मानव।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400























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