Sunday, April 03, 2022

 
ब्रह्मचारिणी
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विधा-मनहरण घनाक्षरी
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रूप सुहाना मां का, कर दे बेड़ा पार,
शरण आओ एक बार, देरी ना कीजिये।



शिव पति जब पाया, जग में कष्ट उठाया,
अर्पणा कहाती है वो, दर्शन कर जाइये।

पापों का नाश करे, दर्शन पा नहीं डरे,
मोहक रूप मां का, मन को जगाइये।


घर भर दे खुशी, ऐसी छवि मां होती,
मां के दर्शन करो, दूर नहीं जाइये।।

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स्वरचित/नितांत मौलिक
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*डा होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400




                            मां ब्रह्मचारिणी
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विधा-कविता
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मां का दूजा रूप सुहाना, ब्रह्मचारिणी कहाती है,
अपने भक्तों पर कृपा कर,निज गले से लगाती है,
सदाचार,त्याग,संयम, कई गुणों से भरी हुई माता,
कष्टों में सदा सहायक, हर वक्त भक्त हँसाती है।

गुडहल,कमल अति पसंद, कर लो मां की पूजा,
जग की रक्षा करने वाली, नहीं कोई उनसा दूजा,
राजा हिमालय के जन्मी, कठोर तप में रही लीन,
हजारों वर्ष फल,फूल खाये,और नहीं कुछ सूझा।

कठोर तप के कारण ही,मां ब्रह्मचारिणी कहलाई,
शिवभोले का पति रूप पाके,वो अति मन हर्षाई,
ज्योतिर्मय रूप सुहाना,हाथ कमंडल और माला,
जप और तप करने की विधी, नारद मुनि बताई।


बिल्वा पत्र खाकर मां ने, धरा पर शयन किया,
पत्ते भी फिर छोड़ दिये,  कठोर तप प्रण लिया,
देव भी उनके तप से प्रसन्न,शिव का नाम लिया,
उनकी पूजा करने से,विचलित नहीं होता जिया।

हजारों वर्ष निर्जल रहकर, शिव भोले को पाया,
देवों ने की प्रशंसा,  माता का भव्य रूप बताया,
मां की पूजा अर्चना से ही, हो जाता जगत नाम,
अपने रूप का दर्शन देकर, हर भक्तजन हँसाया।

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स्वरचित/मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

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