एहसास
************************************
*****************************************
***********************************
विधा-कविता
***********************
मात पिता, गुरु संग मिले, हुआ नया एहसास,
यही तमन्ना जन की है,रहे सदा दिल के पास।
जिंदगी में मिलते हैं वो, मुश्किल से एक बार,
धन दौलत और जिंदगी, उनके समक्ष बेकार।।
दोस्त,सखा एक दिन मिले,हुआ नया एहसास,
हरदम यूं जीवन में मिले, बेहतर होगा काश !
हर विपत्ति में काम दे, जीवन में आये निखार,
हँसते गाते बढ़ चले,जग में मिले अनहद प्यार।।
जब कभी मात पिता खोते, कमी होती एहसास,
दिल बार बार रोता है,जीते कुछ दिन और काश।
पर जग में इंसान का,आना जाना लगा रहता है,
प्रकृति की परंपरा है यह,बेशक न आये ये रास।।
गमन किया जब बाग में, खुशबू हुआ एहसास,
मन में उमंग तब उठी, आया जमकर वो रास।
भंवरे, तितली घूमते, हवा के झोंके देते हैं गिरा,
थोड़े दिन की जिंदगानी,तब हुआ बड़ा एहसास।
सबको छोड़कर जग से, जाना होता है एक दिन,
मन मायूस हो जाता है, दर्द का होता है एहसास,
सोच सोचकर मन खिन्न हो जाता,कैसा संसार है,
दिल से आवाज आई ,समझ वक्त न हो उदास।।
**********************
मौलिक/स्वरचित
********************
*होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 1, मोहल्ला मोदीका
कनीना -123027
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
09416348400
दिन का क्या है
**************************************
*************************************
विधा-कविता
***********
दिन का क्या है, कब हसीं सपने दिखाये,
कब सूर्य उदय हो, वो कब अस्त हो जाये।
कब भोर आये तो मन को प्रसन्न कर जाये,
कौन सी शाम, इंसान को बड़ा दर्द दे जाये।।
दिन का क्या कहे, कौन सी खुशी ले आये,
पता नहीं कब लोगों की जिंदगी बदल जाये।
किस मोड़ पर आकर,जन की शाम हो जाये,
दिन कब रुलाये और न जाने कब ये हँसाये।।
दिन का काम है आना, रात को तब भगाना,
दिन उदय होता है, फिर शाम में बदल जाये।
कितने ही लोग दे जाते , औरों को ये दुआएं,
आओ दिन के साथ पतित को गले से लगाये।।
दिन का क्या है,कब यह भूचाल ही ले आये,
सब कुछ तबाह कर दे, लोग मांगे कुछ दुआएं।
खाने पीने की कमी हो,तरसे लोग हाथ न आये,
किस घड़ी यह मंजर तो, इंसान को ही दुखाये।
दिन होता है तब जाग जाते हैं देश के ही लोग,
देवी देवताओं की पूजा करे, लगाते हैं वो भोग।
बुरे लोग मिले उस दिन तो, मान जाते जन बुरा,
अच्छे लोग गर मिल जाये,वो बेहतर हो संजोग।
दिन का क्या है, लील लेता है हजारों ही लोग,
रावण गये, कुंभकर्ण गये, जिनको था बुरा रोग।
इंसान का फर्ज बनता है,वो सदा ही करे उद्योग,
अपनी शुद्ध कमाई से लगाये प्रतिदिन ही भोग।।
दिन का क्या है, बन जाता है भविष्य की यादें,
कितने जन उठते ही, कर बैठते हैं अनेक इरादें।
सचाई के समक्ष एक दिन, झुकाना पड़़ता शीश,
कभी रह जाते धरे के धरे,रात को किये जो वादें।
दिन का क्या है,कब ले आये सावन की बहार,
कब प्रेमी युगल मिले, बढ़ जाये दोनों में प्यार।
कभी कभी दिन की देखे तो, रात बन जाती है,
कभी अपने मिले तो कभी पराये मिलते हजार।।
**********
स्वरचित/मौलिक
******
* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
KANINA MOHALLA-MODIKA WARD-01 DISTRICT-MAHENDERGARH(HARYANA) PIN-123027 Mob 91+9416348400
Sunday, April 17, 2022
Subscribe to:
Post Comments (Atom)



No comments:
Post a Comment