Saturday, April 16, 2022

        कविता/ बुढ़ापा
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बुढ़ापा जग में हो बुरा, दे जाता है दर्द।
सहारा भी मिट जाता,हवाएं चलती सर्द।
जिनको पाला बड़ा किया, देते वो धोखा,
बिछुड़ गये जब बुजुर्ग, नहीं मिले मौका।।

बुजुर्ग बताते राह भी, देते जब आशीर्वाद,
चले जाते हैं धरा से,आते हैं वो बड़े याद।
देखे हैं जग में अनेक,  करते हैं फरियाद,
बेटा बेटी मां बाप के, बन जाते हैं जल्लाद।।

अनुभव अपना बताते हैं, कैसी है जिंदगी,
हर इंसान का धर्म है, दिखलाए वो बंदगी।
ये वो मील के पत्थर, बताते हैं बीता काल,
ये वो हीरे होते हैं, बदल सकते जन चाल।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा



                            युद्ध है दुखदाई
 विधा- कविता
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युद्ध है दुखदाई, बात बुजुर्गों ने बताई,
मारे जाते हैं लाखों, होती जग हँसाई।
किसी का लाल जाये, रोये चाचा ताई,
युद्ध के परिणाम, सदा बेकार ही बताई।।

युद्ध में बढ़ जाता, चारों ओर प्रदूषण,
सांस लेना दूभर हो, बढ़ते खर दूषण।
युद्ध से नहीं हुआ, भला किसी देश,
युद्ध के बाद बच जाते, चंद अवशेष।।

युद्ध हुआ महाभारत, योद्धा गये मारे,
कैसे कैसे वीर गये, प्राणों के थे प्यारे।
आज भी धरती, उनको ही बस पुकारे,
कितनी मां के गये हैं,अनेक राजदुलारे।।

युद्ध हुआ रामायण में,हुआ रावण अंत,
कितने ही दुख व्यक्त किये, कहते संत।
धर्म कर्म की लाज, बचाई आखिर राम,
रावण संग मारे कितने, पहुंचे स्वर्ग धाम।।

युद्ध जब छिड़ जाता, सब तबाह होता है,
इंसान घुट घुटकर यूं, मन ही मन रोता है।
चहुं ओर डर मन में,कभी नहीं वो सोता है,
युद्ध बुराई के बीज,हर हाल में ही बोता है।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार


सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा


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