दिक्कत होती है
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विधा-कविता
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दिक्कत होती है कभी जब अपना छोड़े साथ,
अपनों के सहयोग का बहुत बड़ा होता हाथ।
बिना साथ के जिंदगी होती है जन की बेकार
जैसे बिन मात पिता के बच्चा मिलता अनाथ।।
दिक्कत होती है कभी जब जाते कभी सुदूर देश,
बोली भाषा बदल जाती बदल जाता जन वेष।
आज के इस जगत में कोई किसी का नहीं मिले,
भाई भाई व भाई बहन में बढ़ता जा रहा है द्वेष।।
दिक्कत होती है कभी जब घट जाते हैं संसाधन,
रोते बिलखते देखा जाता जब ना मिलते साधन।
कलियुग के इस दौर में,इंसान रहता सदा उदास,
सुबह शाम दुपहर में रहता है जन मन से उदास।
दिक्कत होती है कभी,जब नहीं बैठ पाता है मेल,
जिंदगी चार दिनों की होती है, यह होती है खेल।
जीना चाहिए जी भर के चाहे आए सुख व दुख,
एक पिंजरे की पंछी है जैसी हो जाती कोई जेल।।
दिक्कत होती है कभी जब लेता जन कोई उधार,
अपने सारे रूठ जाते हैं, रूठ जाते हैं अपने यार।
पर कभी नहीं सोचना दाता सबके साथ मिलता,
एक दिन जीत होगी जरूर, जिसको कहते हैं हार।।
दिक्कत होती है कभी, जिसका खो जाता है प्यार,
एक चीज होती है ऐसी नहीं मिलती कभी उधार।
प्यार की जिंदगी होती छोटी पर मिलता है आनंद,
कहते हैं जिंदगानी से बेहतर होते दिन प्यार चार।।
दिक्कत होती है कभी, जब ना मिल पाता है गुरु,
गुरु वो देव होता करवाता है शिक्षा अमृत शुरू।
बिना गुरु के इंसान मिलता है अंधेरे में ही डूबा,
हर कष्ट में जो साथ निभाए, होता है वो सतगुरु।।
दिक्कत होती है कभी, पकड़े पाप कर्म जन रोज,
सत्कर्मों के बल पर केवल, कर सकता है मौज।
अधर्म और अन्याय से, निश्चित मानों होगा अंत,
सही राह चलने की अब तो कर लो कोई खोज।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
समन्वयता
विधा- दोहा मुक्तक
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देख समन्वयता लगा, प्रीत भरा संसार,
हर जन मिलता आज भी, अनमिट दिल में प्यार।।
पाप कर्म इंसान को, ले जाता जग दूर,
मिलकर जन से चालिये, वरना होगी हार।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* डा होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा


























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