Monday, April 25, 2022

 

                             खुश खबरी
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कनीना की आवाज
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आपको जानकर हर्ष होगा कि कनीना की आवाज को उजागर करने वाली आरएनआई द्वारा रजिस्टर्ड पत्रिका कनीना की आवाज जल्द ही आ रही है। यह पत्रिका पूर्णरूप से शैक्षिक, कृषि एवं ज्ञान विज्ञान से ओत प्रोत होगी जो विद्यार्थियों और किसानों के लिए लाभप्रद साबित होगी। इस पत्रिका में संदेश, विज्ञापन, आर्टिकल आदि देने के लिए संपर्क करें--
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दोस्त/दोस्ती
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विधा-मुक्तक
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जिनको समझे दोस्त हम, धोखा देना काम।
टांग अड़ाते काम में, रोज करें बदनाम।।
सुपथ चलाता जन कभी, होता है भगवान,
धर्म कर्म के पथ चलो, बनता तन भी धाम।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
चलभाष-09416348400


गुमनामी
विधा-कविता   
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गुमनामी में जीते हैं, सच्चे साधु संत,
प्रभु भक्ति में लीन वे,भक्ति हो अनंत।
वर्षों वर्ष जीते हैं, रोके रखते हैं सांस,
लगता ऐसा कि, नहीं कभी हो अंत।।

गुमनामी का अंधेरा,सुहाता कुछ लोग,
हो निजी जिंदगी,करते नहीं जग भोग।
सादा जीवन है कला,मानता है संसार,
लंबी उम्र जी जाते, तन में नहीं हो रोग।।

रहस्य बना है आज तक, नेताजी नाम,
गुमनामी में जी गये,कहते कुछ अज्ञान।
देशभक्ति दिल भरी,कैसे रहेगा गुमनाम,
चले गये नेताजी, देकर जग को पैगाम।।

गुमनाम जीना कठिन,जीते हैं चंद लोग,
आत्मा से शुद्ध रहे,नहीं मिले कुछ रोग।
बिरले होते ऐसे जन, जीते अपनी शान,
जप तप के बल पर ही, रहते हैं निरोग।।

गुमनाम कुछ जंतु भी,रहते हैं वन आंगन,
कोई नहीं देख पाता, आये माह अगहन।
जीवों का होता है, अपना ही एक संसार,
शांतभाव से जीते हैं, करते कभी न मनन।।

मजबूरी मिले कभी, रहते हैं जन गुमनाम,
पर जीवन निखरेगा, हर सुबह और शाम।
मुश्किल से जीना होता, मन रखते कठोर,
शुद्धता और पवित्रता बना दे,तन को धाम।।

धर्म कर्म की राह पर, गुमनामी अहसास,
अधिक जनों को देश में, आता है ये रास।
धैर्य,धीरज रखते हैं,पूर्ण करते हैं वो काज,
पर ऐसा जीवन सदा,होता है प्रभु के पास।।

आधुनिक युग में गुमनामी,छोड़ो तुम अभी,
बराबर जग के लोग हैं, जिंदगी मिली सभी।
नहीं मौत से डर हो, नहीं जीने की हो चाह,
निडर मानों वो जिंदगी, मिलती नहीं सभी।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह या















दव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

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