सारथी
विधा-कविता
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जीवन लंबा सफर है,
मिलते कई हैं सारथी,
वीर देशभक्त तत्पर हैं,
सेवा करते मां भारती।
अर्जुन के श्रीकृष्ण बने,
जीत हुई थी महाभारत,
विष्णु देव होकर जगत,
हांका था अर्जुन का रथ।
सच्चा सारथी मिले कभी,
कर देगा सही सही काम,
रथ पर बैठता जो जन वो,
कमा पाएगा अपना नाम।
शरीर हमारा एक रथ है,
मन होता इसका सारथी,
मन पर काबू कर लेना,
वरना बनना पड़ेगा प्रार्थी।
आओ रथ व रथी परखे,
कौन सही है कौन बुरा,
कौन बुरा सारथी बनकर,
सीने पर घोंप देगा छुरा।
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जिंदगी
विधा-कविता
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जिंदगी चलती रहे,
जिंंदगी हो यादगार,
जिंदगी में खूब पले,
जिंदगी बने वो प्यार।
जिंदगी बड़ा नाम है,
जिंदगी बड़ा काम है,
सही नहीं चले अगर,
जिंदगी ही शाम है।
जिंदगी में जीना हो,
जिंदगी को पीना हो,
जिंदगी खुशहाल हो,
जिंदगी न बदहाल हो।
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बुजुर्गों का दर्द
विधा-कविता
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बढ़ रहा है दर्द दिलों में,
बुजुर्ग उनमें सबसे आगे,
क्या वक्त आ गया आज,
युवा उनको छोड़कर भागे।
कद्र नहीं अब बुजुर्गों की,
पड़े मिले टूटी कोई खाट,
रंगरलियां मना रहे युवा,
क्या जीवन है क्या ठाठ।
दो वक्त की रोटी न मिले,
पानी को तरसते हैं आज,
दिल की बातें दिल में रखे,
नहीं खोलते, दर्द के राज।
जो बुजुर्ग पालते जिनको,
दे देते हैं अपनी ही जान,
भूखे प्यासे बच्चे को पाले,
आज नहीं उनकी पहचान।
जिस दिन बुजुर्ग कद्र हो,
रामराज फिर आ जाएगा,
सोने की चिडिय़ां हो देश,
स्वर्ग धरा पर जन पाएगा।।
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प्रकाश पर्व
विधा-दोहे
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याद करे गुरु को सदा, बनते बिगड़े काम।
अच्छे कर्मों से मिले, पूरे जग में नाम।।
नानक कहते देख लो, करना शुभ ही काम।
बुरे कर्म करते रहो, नरक मिलेगा धाम।।
दोहे
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आज पाठशाला लगे, दौलत का व्यापार।
बच्चों को ही पीटते, नहीं मिलेगा प्यार।।
ओछे धंधे पल रहे, बिकता है ईमान।
मौज मस्ती करते फिरे, लोफर जगत हजार।।
रक्त बहाते देर ना, देते पल में जान।
देशभक्ति में नाम हो, पूरे जग पहचान।।




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