Saturday, December 05, 2020

 बड़ी देर कर दी
विधा-कविता
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जीवन की राह में,
नहीं चलती मर्जी,
समय पर चलना,
बड़ी देर कर दी।

समय का पाबंध,
नहीं हो खुदगर्जी,
देरी न हो अच्छी,
बड़ी देर कर दी।

दर्द कभी ना दो,
बनो नहीं बेदर्दी,
देरी भ्रष्टाचार हो,
बड़ी देर कर दी।

गर्मी जब बीतती,
फिर आती सर्दी,
सावन भी कहता,
बहुत देर कर दी।

मरीज दम तोड़ता,
चले डाक्टर मर्जी,
नहीं लगती अर्जी,
बहुत देर कर दी।

अन्न पैदा न हुआ,
कैसी खेती करली,
बीज बोया देर से,
बहुत देर कर दी।

विद्यार्थी फेल हो,
खूब लगाई अर्जी,
सालभर पढ़ा नहीं,
बहुत देर कर दी।

युद्ध में हार गया,
तत्परता न बरती,
चारों ओर घिरता,
बहुत देर कर दी।

मरीज बीमार हो,
लापरवाही बरती,
रोग ठीक न हुआ,
बहुत देर कर दी।

बढ़ा हुआ प्रदूषण,
हदें ही पार करली,
अब भी वक्त बचा,
बहुत देर कर दी।

रोग बढ़ता जाएगा,
जब लगी हो सर्दी,
वक्त है बचाव कर,
बहुत देर कर दी।

जोह रहा बाट वो,
अलविदा कर ली,
बेटा रोये देख देख,
बहुत देर कर दी।

सजग,प्रहरी बनो,
हो तुम्हारी मर्जी,
सदा नुकसान हो,
बहुत देर कर दी।
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तुम सिर्फ तुम
विधा-कविता
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तुम सिर्फ तुम,
होना नहीं गुम,
कहो बूम बूम,
हम और तुम।

दिल में है नाम,
सुबह अरु शाम,
बनते सभी काम,
मन मेरा है धाम।

करता हूं बातें तो,
लगता है मेरा मन,
पूस की  रात हो,
या  माह अगहन।

हम और तुम ही,
बनाते निज संसार,
आपस में प्रीत हो,
बढ़ता जाये प्यार।।

दोहे

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भला बुरा अब सोच ले, वरना तन बेकार।
देश प्रेम के काम कर, मिले जगत का प्यार।।

ज्ञान विश्व को बाँटता, फिर भी नहीं गुरूर।
अखण्ड भारत है वही , दुनिया में मशहूर । ।
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अखण्ड  भारत  वर्ष है, मान धर्म निरपेक्ष ।
कोई  दुनिया  में  नहीं ,भारत  के  सापेक्ष । ।
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अखण्ड भारत नाम का, है दुनिया में देश ।
भाई  चारे   का   सदा , देता   है  सन्देश । ।
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देश प्रेम हो मन सदा, करो देश का काम।
मिलता है मौका कभी, खूब कमाओ नाम।।

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