Tuesday, December 22, 2020

 
 दोहा
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पैदा होकर नीच घर, विचार बने पुनीत।
हर जुबान पर नाम हो, दुनिया गाये गीत।।

दुष्ट साथ अब छोड़ दो, कितने कहते संत।
नरक द्वार वो भोगता, कुत्ते जैसा अंत।।

काट सके ना जिसको, आत्मा उसका नाम।
देह बदलती जीव में, अजर अमर हर धाम।।






विधा-कविता  
मां की ममता
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तीनों लोकों की खुशी, मां की ममता होती,
दुख दर्द बच्चे पर पड़े, घुट घुटकर वो रोती,
स्वर्ग सा सुख देती है,खुद कष्टों में ही सोती,
मां से बड़ी देवी तो, पूरे जगत में नहीं होती।

मां की ममता स्वर्ग है,मां का आंचल धाम।
मां की सेवा रोज कर, हो जाए जग नाम।।
मां की स्वर्ग मां ही धरा, मां हो सुंदर धाम।
नमन करो मां को हरदम, सफल होंगे काम।।

सुबह शाम सेवा करो, बन जाये बिगड़े काम,
आशीर्वाद सदा मिलता रहे,सुबह हो या शाम,
मां तेरी ममता मिले, अगले जन्म में भी खूब,
मां की बातों में लगता, कोमलता हो ज्यों दूब।।
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विषय-प्रतीक्षा
विधा-कविता
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अति कठिन है प्रतीक्षा, करके देख लो।
कड़वे मीठे अनुभव को, खुद सीख लो।।
प्रेमी युगल चले जिस राह थी वो अनोखी,
प्रतीक्षा के लिए कुछ, समय की भीख लो।।

प्रतीक्षा के नाम पर, झलके माथे पर दर्द।
प्रतीक्षा हो कठिन, जब चले हवायें सर्द।।
समय के साथ चल सके वो सच्चा इंसान,
प्रतीक्षा कर संयम बरते, वो सच्चा है मर्द।।

प्रतीक्षा से बढ़कर जग, नहीं कोई भी काम।
प्रतीक्षा करते करते, बीत जाये सुबह शाम।।
संयम अपने आप में बहुत बड़ा होता खेल,
जो प्रतीक्षा पर खरे उतरे, होता जग में नाम।।

प्रतीक्षा विकट घड़ी, नहीं आसान यह खेल।
प्रतीक्षा के बाद ही, हो दो दिलों का मेल।।
समय काटना मुश्किल हो, कभी कभी इंसान,
प्रतीक्षा की याद घड़ी में, जन की बनती रेल।।

प्रतीक्षा करते करते कभी, मिलती इंसान हार।
प्रतीक्षा हो इस जीवन में, सच्चा एक आधार।।
नाम कमाने की खातिर क्या क्या खेल रचाये,
प्रतीक्षा में आनंद आता, मिलता अनहद प्यार।।










प्रतिक्षा
विधा-कविता
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दर्द दिलों में उमड़ पड़ेगा
बीत नहीं पायेगा ये दिन,
शाम ढले फिर रात आए,
रात कटे नहीं तारे गिन।

वो दिन प्रतीक्षा के कहो,
दर्शन दुर्लभ होएंगे सनम,
इच्छा दिल की पूरी नहीं,
आंसुओं से आंखें हो नम।

सुबह शाम ललक मिले,
कैसे उससे मिलन होगा,
कभी बाग, कभी उपवन,
दुख दर्द में जीवन भोगा।

आएगा वो भी एक दिन,
मंजिल अपनी होगी पास,
उससे मिलन होगा अपना,
कष्ट दर्द सब होगा नाश।।


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