बचपन
विधा-मुक्तक
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अजब गजब के दिन है, रातें लगे सुहानी।
बचपन की याद हैं, कभी मांगते पानी।।
बच्चों की इस जग में ,हो दुनिया निराली,
बचपन की शरारतें, की बहुत मनमानी।।
बांसुरी
विधा-दोहा छंद
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सुनों बांसुरी धुन कभी, मन में उठे उमंग।
साथ ढोल की थाप पर, उभरे सुंदर रंग।।
किसन बांसुरी जब बजे, दिल का नाचे मोर।
प्यार रंग मन मोह ले, नैन मिले चितचोर।।
नटखट राधा सुन रही, किसन सलोना रूप।
बजे बांसुरी धुन कभी, दिल तरसे जग भूप।।
वंदना
विधा-कविता
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वंदना उस देव की,
जिसने जन बनाया,
उजले मुख दिये हैं,
पल में उसे हँसाया।
वंदना मात पिता की,
जिन्होंने हमको पाला,
जगत का ज्ञान दिया,
मुसीबतों से निकाला।
वंदना गुरुदेव की हो,
जो सृष्टि का दे ज्ञान,
पूरे जगत में होती है,
जिससे मेरी पहचान।
वंदना धरती मां को,
जिसने दिया सहारा,
तरुवर हमको प्यारे,
प्राण कहाते हमारा।।
कविता
कविता/नव वर्ष
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जल्दी करके आना है,
नव वर्ष खुशी लाना है,
हमने तो इतना माना है,
2020 को यूं भगाना है।
बहुत दर्द दे रहा 2020
कुछ तो सोचो जगदीश,
खुशियां पास बुलाना है,
नया साल गले लगाना है।
नया साल लेकर आएगा,
हर जन के मन में खुशी,
मजदूर, किसान घर बैठे,
कितने मन से होके दुखी।
कितने लोग लील दिये,
उनको अब भुलाना है,
नये वर्ष को सजाना है,
प्यार से उसे बुलाना है।
कह दो पुराने साल से
अब वो समेट ले काम,
भाग जा कह देना इसे,
खूब किया तग बदनाम।
कहना नये वर्ष से अब,
हंसकर आये जग हँसाये,
कोरोना से जो मर रहे हैं,
उनको आकर तुरंत बचाये।।





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