जरा सुनो
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आज का विषय- मुक्त
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महामारी, सर्दी, सड़कों पर किसान।
विधेयक तीन और सरकार परेशान।।
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कुडलियां
विधा-कुंडलियां
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घबराना क्या देखकर,दुख सुख छाया धूप ।
रहना है हर हाल में , कुदरत के अनुरूप ।
कुदरत के अनुरूप , चलें तो सुख पाएंगे ।
रहें अगर विपरीत , रोग बढ़ते जाएंगे ।
करता सदा सचेत ,बदल मौसम का आना ।
सर्द गर्म बरसात , देखकर क्या घबराना ।।
कविता नव वर्ष
नव वर्ष विदाई
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राक्षस सा बनकर,
जा रहा वर्ष 2020
लाखों जनों के घर,
बचाये वो जगदीश,
विदा कर दो इसको,
फिर ना मिले कभी,
2021 खुशी लाएगा,
आशा कर रहे सभी।
भुला डालो सारे गम,
प्रसन्नता लाओ अभी,
बीत गई वो बात गई,
फिर ना आएगी कभी।
मंगलमय हो नव वर्ष
करते रहेंगे शुभकामना
खुशियां जमकर मिले
गमों का न हो सामना।
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परिंदे
विधा-कविता
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उन्मुक्त गगन में उड़ते,
लगे नहीं कुछ भी दूर,
परिंदे अपनी खुशी से,
उड़ते फिरते वो सुदूर।
नहीं बैर भाव वे रखते,
आपस में मिलता प्यार,
एक साथ मिलकर रहे,
बातें करें मिलके हजार।
जरूरत पड़ी घर बनता,
वृक्षों पर ही रहते सदा,
उड़ते फिरते मम मर्जी,
अनोखी उनकी है अदा।
इंसान के मन लुभाते हैं,
सुरीली आवाज मिलती,
डाली -डाली वो घूमते,
पुष्प कली जब खिलती।
मानव के सहायक होते,
पक्षियों का सुंदर संसार,
मार नहीं कभी इनको,
कर लो बस इनसे प्यार।।
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पथ नया अपना रहा हूं
विधा-कविता
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निज जीवन बीता रहा हूं,
एक नया गीत गा रहा हूं,
दुनिया को बहुत दिया है,
पथ नया अपना रहा हूं।
कभी डगमग मेरा जीवन,
अब सीधा चल पा रहा हूं,
लोगों खातिर उदाहरण हूं,
पथ नया अपना रहा हूं।
माता पिता गुरु प्रिय मुझे,
उनका ऋण उतार रहा हूं,
परहित में सदा जीता हूं,
पथ नया अपना रहा हूं।
एक दिन उस प्रभु से पूंछू,
उनके ही गीत गा रहा हूं,
भवसागर में भ्रमित होकर
पथ नया अपना रहा हूं।।
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अमानत
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अमानत है जन की जिंदगी,
खेलों कूदो लो पल दो पल,
आज करना है, जो कर लो,
पता नहीं क्या हो जाए कल।
अमानत किसी का प्यार गर,
लौटा देना चाहिए समेत सूद,
सोच सोचकर समय न गंवा,
वरना एक दिन ले आंखें मूंद।
अमानत किसी की मत रखो,
वरना मिलेगा नरक का द्वार,
संकट ही संकट छायेंगे तब,
एक दिन जन की होगी हार।
अमानत मान लेना आज ही,
अपना आज यह सारा शरीर,
सौंप दे शरीर को उस प्रभु से,
वो दाता है हर लेगा सब पीर।



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