Wednesday, December 02, 2020

 वरदान
विधा-कविता
***********

******************************

***************************
जीवन तो वरदान है,
जब जीना हो शान।
वरना यह अभिशाप है
इतना तो पहचान।।

जीवन जीने की कला,
समझ इसे वरदान।
कीमत इसकी जान ले,
बन जाये पहचान।।

प्रभु सेे जीवन पाकर,
घमंड का क्या काम।
न जाने किस मोड़ पे,
हो जायेगी शाम।।

आये हो इस जग में,
प्रभु से पा वरदान,
निस्सार जीवन जीना,
कहाए जन हैवान।।
********************
तनाव में तन मन
विधा-छंदमुक्त
*********************

तनाव में तन मन
हर जीवन है आज
ढूंढ रहा शांति को
खुद जिम्मेदार है,

खुद मारता कुल्हाड़ी
अपने ही पैरों पर वो
फिर पूछता औरों से
यह दर्द क्यों होता है,

तनाव में तन मन हो,
भूल जाएगा वो आराम,
समय निकालकर बैठ
रट ले प्रभु को आज।।
********************


कुछ न कुछ सिखलाते हैं: हार/प्यार/यार
विधा-कविता
****************************

बहुत कुछ सीखलाती
जीवन में जब हो हार,
नयी सबक मिल जाती,
जीत के खुलते हैं द्वार।

हार से जो  शिक्षा पाये,
वो एक दिन जीत जाये,
हार को हार मानतेे जो,
मिट्टी में ही मिल जाये।

हार लगी गौरी को तो,
बार बार किये थे युद्ध,
जीत लगी उसको हाथ,
पृथ्वीराज को कर क्रुद्ध।

नृप ब्रुश की कहानी है,
बार बार वो हार जाता,
एक मकड़ी से ले शिक्षा,
एक दिन वो जीत जाता।

हार सदा ही सिखाती है,
जीत का रास्ता बताती है,
हार से हार कभी न मोने,
हार जीत में समा जाती है।
********************

डिजिटल दुनिया
विधा-कविता
****************

 
डिजिटल का जमाना आया,
हुआ डिजिटल आज संसार,
मां,बाप,गुरु डिजिटल हुये हैं,
डिजिटल हो गया जग प्यार।

डिजिटल को  देख-देखकर,
बुजुर्ग रो रहे हैं आज बेचारे,
डिजिटल का युग ऐसा आया,
भुला दिये हैं सभी यारे प्यारे।

एक समय था डिजिटल का,
प्रयोग प्रसार हुआ अति कम,
आज युग विज्ञान का युग है,
डिजिटल का  फूट गया बम।

डिजिटल हुआ हर नर नारी,
डिजिटल हो गई खेत क्यारी,
डिजिटल हो गई प्रथा हमारी,
डिजिटल आगे मति सब मारी।

आएगा वो जमाना जल्दी ही,
पूरा इंसान डिजिटल जायेगा,
पल में मुम्बई पल में दिल्ली,
डिजिटल अन्न भोजन पाएगा।

दोहे
****************








सुबह शाम लो नाम प्रभु, खुशियां मिले हजार।
नेकदिली बनकर जहां, जन जन से कर प्यार।।

कठिन नहीं है जिंदगी, हँसते गाते खेल।
जन जन में गर प्यार हो, बढ़े जगत में मेल।।

प्रहसन सम हो जिंदगी, मिटे मनुज के रोग।
व्यसनों में पड़ कर लगे, नरक लोक का भोग।।


No comments: