Monday, November 30, 2020

 मिलना बिछुडऩा
विधा-कविता
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मिलना बिछुडऩा सदा रहे,
कहलाती है जग की रीत,
निश्चित ही मिलना होगा ,
मिलने से बढ़ जाए प्रीत।

बिछुडऩा भी भाग्य बदा,
फिर क्यों मन में इतराते,
चला जाना है एक दिन ,
जो इस जग में जन्म पाते,

मिलने पर मत इतराना,
बिछुडऩे पर मत पछताना,
यह जग मुसाफिरखाना है,
लगा रहता है आना जाना।।
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   सर्दी
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सर्दी सता रही है जन को,
रो रहे लोग, गरीबी मार,
देखो इन गरीब जनों को,
कर लो कभी इनसे प्यार।

प्रभु ने बनाया सबको ही,
लगती है ठंड हर शरीर,
इंसान वहीं कहलाता है,
जो जग की लेता हर पीर।

प्रभु ने बनाया अजब जग,
बना डाला गरीब तो अमीर,
गरीब वहीं जो दान नहीं दे,
दानदाता होता जग में अमीर।

दान पुण्य से, पहचान बने,
कह गये कितने जग के संत,
धन दौलत को जोड़ते रहना,
हो जाएगा एक दिन ही अंत।
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निगरानी/निरीक्षण/देखरेख/अभिभावकत ा/सरपरस्ती/संरक्षण... इत्यादि
विधा-कविता
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देखरेख जब होती रहे,
घर में बच्चे की आज,
रोग दोष दूर हो जाएंगे,
दुनियां को होगा नाज।

देखरेख अभाव रहेगा,
पनप नहीं पाएगी पौध,
देखरेख बुजुर्ग की करो,
हो चुका है यही शोध।

संरक्षण माता पिता का,
मिलता हर किसी बाल,
आगे बढ़ता वो जाएगा,
उन्नति करेगा हर हाल।

नहीं कभी कोई डर रहे,
जिस घर में हो देखरेख,
सूना घर कभी देख लेंगे,
चोर घुस सकते अनेक।

निगरानी में  हैं पनपते,
जीव, पेड़ और इंसान,
निगरानी आज के दिन,
जरूरी बनी अब मान।।


हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर
विधा-कविता
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बुजुर्ग सभी को, बनना है,
बुजुर्ग मिलते हर घर-घर,
बुजुर्गों से, आज सीख लो,
हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर।

लंबा अनुभव, उनके पास,
करते आये पापों का नाश,
वो ही आशा वो ही सांस,
बुजुर्ग धरोहर रखना पास ।

सेवा करो बुजुर्गों की अब,
बोलों मुख से सदा हर हर,
जब घर में होता है बुजुर्ग,
नहीं होता है जन तब डर।

जिन बुजुर्गों ने पालापोशा,
चलना व हँसना सिखाया,
बुजुर्ग अमानत हैं दाता के,
जिन्होंने सीने से है लगाया।

हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर,
जिस दिन नारा लग जायेगा,
अमन चैन धरा पर मिलेगा,
रामराज्य फिर चल आयेगा।

सम्मान करे बुजुर्ग रहे खुश,
कभी नहीं देना उनको दुख,






वरना वो  दिन दूर नहीं हो,
प्रभु भी तुमसे होगा विमुख।।

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