शशि/राकेश/मयंक/इंदु/सुधाकर....
विधा-दोहे
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अंबर पर शशि दे रहा, शीतल सलिल प्रकाश।
रश्मि भरे मन में खुशी, करे दर्द का नाश।।
हँसे राकेश नभ कभी, धरती हो खुशहाल।
सूरज आकर पूछता, जन जन का ही हाल।।
इंदु देख मन नाचता, अंधेरा करे निराश।
सूरज देखा जब कभी, रोग हुआ सब नाश।।
बस तेरा ही चेहरा
विधा-कविता
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कभी गये थे अलवर,
बांधकर सिर सेहरा,
आज भी याद आता,
बस तेरा ही चेहरा।
सहेली तुम्हारी संग,
लगा था जैसे पहरा,
तब नजर आया था,
बस तेरा ही चेहरा।
वचन दिये हैं साक्षी,
लगाया अग्नि फेरा,
पल्लू में झलक रहा,
बस तेरा ही चेहरा।
बंधन में बंध आये,
कनीना डाला डेरा,
लुगाई देखने आई,
बस तेरा ही चेहरा।
दीये खुशी के जले,
हो गया जब अंधेरा,
देखा था तब हमने,
बस तेरा ही चेहरा।
हँसते रहे खाते रहे,
किया नहीं तेरा मेरा,
जगमग रोशन हुआ,
बस तेरा ही चेहरा।
बीते आठ वर्ष तब,
कर्क रोग डाले डेरा,
दर्द में डूब गया तब,
बस तेरा ही चेहरा।
मेरा भाग्य रोया था,
दुर्भाग्य बना वो तेरा,
दूर नजर आने लगा,
बस तेरा ही चेहरा।
किस्मत मेरी फूटी,
बीता दिन सुनहरा,
तरसता रहा देखने,
बस तेरा ही चेहरा।
मुसीबत आई बड़ी,
दर्द मिला वो घनेरा,
ढूंढा नहीं मिला वो,
बस तेरा ही चेहरा।
10 वर्ष बिछुड़े हुये,
भूला चुका हूं बसेरा,
याद आता रह रहके,
बस तेरा ही चेहरा।
आज दिल उदास है,
मेरा चमन दर्द बखेरा,
देख देख अश्रु बहते,
बस तेरा ही चेहरा।
दर्शन दे दो एक बार,
हो मन से दूर अंधेरा,
मृत्यु तक नहीं भूलेंगे,
बस तेरा ही वो चेहरा।।
परिवार की छांव
विधा-कविता
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परिवार की छांव लगती प्यारी,
सुंदर सलिल सरस नहीं उधारी,
नाव समान होती है उसमें गति,
उसने ही नैया जग पार उतारी।
परिवार की छांव जग में महान,
कहलाती वो हर जन की शान,
बनाता सदस्यों की एक पहचान
परिवार का करो, सभी सम्मान।
परिवार की छांव सबको मिले,
बस एक ही दुआ प्रभु से करते,
परिवार सदा सुंदर पथ पर चले,
कुपथ राह चलने से सभी डरते।
परिवार सदा उन्नति करता रहेगा,
नाम कमाये बस आगे ही बढ़ेगा,
हर जन इसकी राह चलना चाहे,
इसका नाम नभ में और चढ़ेगा।
परिवार बांधता सदस्यों को सदा,
देता है सहारा हो प्रभु का प्यारा,
परिवार में मिलजुल के रहे सभी,
बस यही एक फर्ज बनता हमारा।।




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