Monday, December 21, 2020

 सुनो
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आज का विषय-
आसमान छूने लगी महंगाई की आन ।
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आसमान छूने लगी महंगाई, नेता ले रहे अंगड़ाई।
सड़कों पर किसान बैठे, सरकार की जग हँसाई।।
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 दोहा

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पाप करे वो रात दिन, खुल जाती है पोल।
जन की कीमत जान लेे, जीवन है अनमोल।।

कुर्सी कीमत देखकर, मन ललचाये लोग।
कुर्सी चक्कर जान ले, बहुत बुरा है रोग।।

बुरा करके खुश हुआ, नीच कर्म ले मान।
अंत समय पछता रहा, कितना है अंजान।।
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तेरे मेरे सपने
विधा-छंदमुक्त कविता
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तेरे मेरे सपने बने हसीन,
कभी यहां तो कभी वहां,
जीवन की नैया हिचकौले,
अनमिट कांटों का सफर।

सपने इंसान को ले जाये,
कभी नभ  कभी पाताल,
नहीं होते ये कभी अपने
कभी कर देते हैं बेहाल।

सपने कभी देते हैं हँसी,
कभी मन को देते रुला,
कभी प्यासे  धरा तड़पे,
कभी डूब के जाये मर।

सपनों पर विश्वास न कर,
कभी नहीं ले जाये पार,
कैसे किसी से यूं कहिये,
सपने में होता बंटाधार।।
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प्यार की सर पे रहने दे छतरी सनम
विधा-कविता
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प्यार की सर पे,
रहने दे छतरी सनम,
प्यार में इजाफा,
ना होने पाये यह कम।

प्यार वो दवा,
करे दिल का रोग दूर,
यह दवा ले लो,
फिर काहे का गरूर।

हीर और रांझा,
बने उदाहरण संसार,
सोहनी महिवाल,
घटा कभी नहीं प्यार।

हंसते हुये जीते
प्यार की मिले खुराक,
वरन यह जिंदगी
एक दिन बनती है राख।

सनम हो प्यारा,
मिलता है उसे किनारा,
सनम की मार से,
उभरे नहीं जन दुकारा।

प्यार की छतरी
बचाती आंधी बरसात,
हर हंसीन संग
मिले हमेशा सनम साथ।
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कविता
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छुप छुप मन से सोचती,
कब आयेंगे वो प्राणप्रिय,
पल पल राह निहार रही,
आकर पुकारेंगे प्रिय प्रिय।

साज शृंगार कर चुकी हूं,
हसरतें दिल में बसी हुई,
शांत भाव से आंगन बैठी,
सुनाई पड़ेगी आहट कहीं।

मधुर मधुर मुस्कान लिये,
कपोलों पर लालिमा छाई,
प्राणप्रिय का मन मोह लूं,
गौरा तन अब ले अंगड़ाई।

आएंगे जब प्रिय मेरे द्वारे,
पकड़ लूंगी मैं कस आज,
कुछ अपने दिल की कहूं,
कुछ उनसे भी पूछूंगी राज।

बेशक कोई कुछ कहता है,
सांवला  सलौना मेरा पति,
उसके चरण स्पर्श कर लूं,
तब ही होगी मेरी सद्गति।

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