विषय-किस्सा कुर्सी का
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कुर्सी की माया बड़ी निराली,
नहीं मिले फिर देते हैं गाली,
कुर्सी की माया बड़ी निराली,
नहीं मिले फिर देते हैं गाली।....
हाथ जोड़ते जन पैर पकड़ते,
जोड़ तोड़कर पा लेते कुर्सी,
पांच साल तक नहीं पूछते
हॅँसी खुशी हो या मातमपुर्सी।
दूर बैठकर, वो खुशी मनाते
बजाते रहते हैं सदा ताली,
कुर्सी की माया.......
जब कुर्सी कभी नहीं मिले तो
नाराज हो जाएंगे झटपट,
घर पर हो या सदन में बैठे
बजाते फिरेंगे हैं वो लट्ठ
दिन में भी वो रोते देखे हैं
रातें बन जाती उनकी काली
कुर्सी की माया.....
जब कुर्सी पास में होती है
भर लेते हैं जमकर तिजोरी
खुद रसूख के बल पर लगाते
नौकरी करते हैं छोरा छोरी
देखो कितने ही नेताओं ने
देश में कितनी लूट मचा ली
कुर्सी की........
जनसेवा काम को भूल गये
अब अपनी सेवा वो चाहते
इसलिए सारी भागदौड़ कर
अपनी कुर्सी को आप बचाते
कुर्सी पा कर इन नेताओं ने
जगत में जमके नाम कमा ली,
कुर्सी की माया....
कुर्सी की माया बड़ी निराली,
नहीं मिले फिर देते हैं गाली,
कुर्सी की माया बड़ी निराली,
नहीं मिले फिर देते हैं गाली।....
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*होशियार सिंह यादव
दोहा****************************
कली, फूल को कह रही, बहुत बुरा संसार।
माला खातिर तोड़ ले, करे दिखावा प्यार।।
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*होशियार सिंह यादव
दोहा
कली, फूल को कह रही, बहुत बुरा संसार।
माला खातिर तोड़ ले, करे दिखावा प्यार।।
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सावन रिमझिम जब लगे, बम-बम भोले शोर।
कॉँवर कंधे ले चले, मन को करे विभोर।।
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--होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
नमन दोहा
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सुख दुख के दो फूल हैं, भरे कहानी रंग।
उतार चढ़ाव झेलती, कभी प्यार की जंग।।
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काम करे जग में सही, नहीं कभी अभिमान।
चुगली चाटा ना करे, वहीं जन है महान।।
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जप,तप,समाधि लीन हो, मुख मेें गंगा ज्ञान।
यौवन को काबू करे, वो है संत महान।।
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अनपढ़ भी राजा बने, ज्ञानी उनके दास।
बुद्धिमान की देख लो, मति चरती है घास।।
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*होशियार सिंह यादव






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