Saturday, July 25, 2020



विषय-परोपकार की परिभाषा
विधा-पद्य
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परोपकार जग में भला,कर लो दिनरात,
तन मन धन अर्पित करे, हो बड़ी बात,
मरते हुये जीवन दे, रखे जन से आशा,
परहित ख्याल करे, परोपकार परिभाषा।

देशभक्त जग में हुये, करे देश की सेवा,
जीवन कुर्बान कर दे, नहीं चाहिए मेवा,
पेड़ पौधे, नदियां भी,करते जन उपकार,
इंसान को चाहिये, कर उनका हितकार,

देव,भक्त,वीर,दानी,पूरा भरा है इतिहास,
अपनी जिंदगी देकर, किया काज खास,
दुष्ट,पापी, नीचों को,  देव करते विनाश,
गरीबों को जग में, हितकर जन से आस।

कवि,लेखक,पत्रकार हुये, परोपकार कर्म,
सच का मार्ग ना छोड़ा,जान जाए वो धर्म,
जान अपनी दे गए, लिख गये हैं इतिहास,
उनके बस कर्मों में,जनहित बात थी खास।

पेड़ फलों से जन का, करता सदा उपकार,
नदियों, नाले, जल से, करते जन से प्यार,
इंसान ऐसा जीव है, समझता नहीं उपकार,
सोच सोच मन उदास, दिल  जाता है हार। 

परोपकार की परिभाषा, समझे जब इंसान,
तक ही पूरे जग में, होगी जन की पहचान,
जो उपकारी जगत में,समझे उनका उपकार,
जीवन सुंदर बन जाए, मिले जन जन प्यार।।
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विधा-कविता
विषय-कोयल
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कोयल गाती गीत सुहाने,मन को करे विभोर,
बागों में बहार आती, सावन बरखा करे शोर,
मिश्री कानों में घुलती,बागों में नृत्य करे मोर
काले काले बादल आये, छायी घटा घनघोर।

बसंत बहार में फूल खिले, आ जाती बहार,
मन बाग बाग होता, प्रेमी की आंखें हो चार,
भंवरे गूंजन करते हैं, जब होती कली तैयार,
लुक्का छिपी करते, चकवा संग चकवी प्यार।

कोयल मतवाली होती, रंग बेशक हो काला,
बागों में कूकती, कौवा के  मुंह लगता ताला,
प्रकृति छटा बिखेरती, सूरज गर्मी दे उजाला,
तन मन निखरे नर नारी, फेरे प्रेम की माला।

एक छोटा सा पक्षी है, मन को करता प्रसन्न,
एक मानव की वाणी से, दर्द उठता तन मन,
निज वाणी कोयल सी बने, करो ऐसा उपाय,
धन के पीछे भागता है, करता है हाय-हाय।।







यादों की बारात
विधा-सायली
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1.
यादों
की लेकर
बारात को जब
पहुंचे घर
द्वार।

2.
यादो
की बारात
निकले घर द्वार
मिलेगा साजन
प्यार।

3.
घर
से निकली
यादों की बारात
हो गई
रात।
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नमन
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झूला झूले नारियां, लेती झोले जोर।
सावन पावन माह में, टिड्डे करते शोर।।
टिड्डे करते शोर , मोर नाचे बागों में।
सुनो मेघ मल्हार , श्रेष्ठ होता रागों में।।
टप टप बूंदें देख ,सखी क्यों साजन भूला।
देखी भागम भाग , बाग में छोड़ा झूला।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा


कुंडली नंबर 01

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झूला झूले नारियां, लेती झोले जोर।
सावन पावन माह में, टिड्डे करते शोर।।
टिड्डे करते शोर, नाचे बागों में मोर।
छाये बादल खास, आसमान बिजली घोर।।
बरसती बूंद देख, नवेली साजन भूला।
मच गई भागदौड़, छोड़ बागों में झूला।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा


दोहे
विषय-ईश्वर/दाता/रब
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जग से टूटे प्यार तो, रब का मिलता साथ।
जन भूले वो भूलता, न होने दे अनाथ।।

नाता प्रभु से जोडिय़े, जीवन में दे साथ।
मानव से मन ले हटा, दाता पकड़ों हाथ।।

सच्चा जग में मान ले, दाता का है नाम।
झूठी होती रीत हैं, ईश्वर करता काम।।
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